सत्या राजपूत रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में गुरुमुख नगर पचपेड़ी नाका से भाटागांव तक कैनाल रोड 2.0 बनाने का प्लान है, जिसके लिए कई घरों को तोड़ने की तैयारी है। बेघर होने से बचने के लिए पीड़ित परिवार ने आज निगम का घेराव किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि हमें 80 फीट रोड नहीं चाहिए और ना ही हम अपना घर छोड़ेंगे।

क्या है पूरा मामला ?

आरोप है कि कि 40 साल से अधिक समय से बसे परिवारों को बिना किसी सूचना, सर्वे या पुनर्वास नीति का पालन किए बेघर करने की तैयारी की जा रही है। पीड़ितों का कहना है कि सड़क को 80 फीट चौड़ा बनाने का प्रावधान रखा गया है, जबकि 30 फीट में भी पर्याप्त जगह उपलब्ध है। उन्होंने दावा किया कि नहर के बीच के खंभों को हटा देने से ही सड़क काफी चौड़ी हो सकती है। परिवारों ने स्पष्ट कहा कि हमें 80 फीट का रोड नहीं चाहिए, हम अपना घर नहीं छोड़ेंगे

एक-एक ईंट में खून-पसीना लगा है

एक प्रभावित महिला ने बताया कई लोगों ने कर्ज लेकर, खेत बेचकर घर बनाए हैं। आज भी बैंक का लोन भर रहे हैं और जहां रह रहे हैं, वहां का टैक्स भी जमा कर रहे हैं। अब सब कुछ छिन जाएगा।

परिवारों ने पूर्व में 14 अप्रैल और 22 अप्रैल 2026 को सांसद एवं निगम को आवेदन दिए थे, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला है। हरिभूमि समाचार पत्र में 8 मई 2026 को छपी खबर के अनुसार, निगम ने डीपीआर तैयार कर राज्य शासन को सौंप दिया है.

नेता चुनाव में वादे करते हैं, जीतकर भूल जाते हैं

पीड़ितों ने बताया कि भारतीय जनता पार्टी के सांसद बृजमोहन अग्रवाल समेत स्थानीय नेताओं ने पहले आश्वासन दिया था कि किसी भी निवासी का घर नहीं तोड़ा जाएगा और रोड नहर तक ही बनेगा. लेकिन अब उलटा हो रहा है। उन्होंने यातायात दबाव कम करने के वैकल्पिक विकल्प भी गिनाए

नया भारतमाला प्रोजेक्ट (NHAI) – दुर्ग के तेडेसरा से आरंग तक हाईवे जल्द शुरू होने वाला है. रिंग रोड-1 पर लाभांडी से टाटीबंद तक चौड़ीकरण चल रहा है। नया रिंग रोड-5 (चांदनीडीह से खिलोरा) प्रस्तावित है। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद कैनाल रोड पर अतिरिक्त दबाव कम हो जाने की संभावना है।

महिलाएं झाड़ू-पोछा कर चलाती हैं घर

प्रभावित क्षेत्र के अधिकांश परिवार मजदूरी पर निर्भर हैं। महिलाएं आसपास के अस्पतालों और कॉलोनियों में काम करती हैं। परिवारों का कहना है कि यदि उन्हें यहां से हटाया गया तो 1000 से अधिक परिवारों की रोजी-रोटी और बच्चों का भविष्य खतरे में पड़ जाएगा। सुबह से निगम घेराव में बैठे पीड़ितों ने बताया कि शाम 4 बजे तक कोई अधिकारी या महापौर उनके पास नहीं पहुंचा है। पीड़ित परिवारों ने सांसद बृजमोहन अग्रवाल और प्रशासन से अपील की है कि कैनाल रोड 2.0 का निर्माण नहर तक ही सीमित रखा जाए और उनके घरों को बचाया जाए।

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