रायपुर। श्री नारायणा हॉस्पिटल में चल रहे मेगा हेल्थ कैंप के दूसरे दिन स्पाइन एवं ऑर्थोपेडिक सर्जरी को लेकर विशेष कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रदेश के 100 से अधिक ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञों और डॉक्टरों ने हिस्सा लिया। इस दौरान देशभर से पहुंचे नेशनल फैकल्टी ने आधुनिक सर्जिकल तकनीकों और जटिल मामलों के उपचार से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं।

ओटी ऑब्जर्वरशिप प्रोग्राम में सीखी आधुनिक सर्जरी तकनीकें

मेगा हेल्थ कैंप के दूसरे दिन प्रदेश के ऑर्थोपेडिक चिकित्सा विशेषज्ञों के लिए हॉस्पिटल परिसर में ओटी ऑब्जर्वरशिप प्रोग्राम आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य नेशनल फैकल्टी को असिस्ट करते हुए स्पाइन एवं ऑर्थोपेडिक सर्जरी में वर्तमान में इस्तेमाल हो रही नई तकनीकों को करीब से समझना और उन्हें व्यवहारिक रूप से सीखना रहा।

इस दौरान विशेषज्ञों को ऑपरेशन की प्रक्रिया, तकनीक और जटिल मामलों के प्रबंधन से जुड़ी बारीकियों को समझने का अवसर मिला।

कॉम्प्लिकेटेड स्पाइन सर्जरी से लेकर अवेक स्पाइन सर्जरी तक पर चर्चा

कार्यक्रम के तहत छत्तीसगढ़ ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन के सहयोग से स्पाइन एवं ऑर्थोपेडिक कॉन्फ्रेंस का भी आयोजन किया गया। कॉन्फ्रेंस में कॉम्प्लिकेटेड स्पाइन सर्जरी, नी जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी, हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी, लंबर फ्यूजन और अवेक स्पाइन सर्जरी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई।

नेशनल फैकल्टी के साथ छत्तीसगढ़ के विभिन्न ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञों ने भी केस प्रेजेंटेशन दिए। इन प्रेजेंटेशन के माध्यम से जटिल मामलों, उनके उपचार और सर्जरी में अपनाई जाने वाली आधुनिक तकनीकों पर विस्तार से जानकारी साझा की गई।

100 से अधिक डॉक्टरों ने लिया हिस्सा

स्पाइन एवं ऑर्थोपेडिक कॉन्फ्रेंस में प्रदेश के 100 से ज्यादा डॉक्टरों ने भाग लिया। कार्यक्रम में विशेषज्ञों के बीच केस डिस्कशन और अनुभवों का आदान-प्रदान भी हुआ। इससे प्रतिभागियों को स्पाइन और जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी के क्षेत्र में नई तकनीकों को समझने का अवसर मिला।

डॉ. सुनील खेमका बोले- चिकित्सा शिक्षा को बढ़ावा देना भी जरूरी

श्री नारायणा हॉस्पिटल के डॉ. सुनील खेमका ने बताया कि मेगा हेल्थ कैंप में जरूरतमंद मरीजों के इलाज के साथ चिकित्सा शिक्षा को भी प्राथमिकता दी जा रही है। कैंप के दूसरे दिन आयोजित एकेडमिक कोर्स में प्रदेश के ऑर्थोपेडिक स्टूडेंट्स और हड्डी रोग विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया।

उन्होंने बताया कि देश के प्रसिद्ध नेशनल फैकल्टी के साथ डॉक्टरों का वन-टू-वन केस इंटरेक्शन भी हुआ। इस दौरान डॉक्टरों को संबंधित केस की बारीकियों को समझने और उपचार की आधुनिक तकनीकों के बारे में सीधे विशेषज्ञों से जानकारी लेने का अवसर मिला।

डॉ. खेमका ने कहा कि वर्तमान परिप्रेक्ष्य में मरीजों को बेहतर चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी ऐसे आयोजनों के माध्यम से चिकित्सा शिक्षा को बढ़ावा देना भी है। इस तरह के कार्यक्रमों से डॉक्टरों को नई तकनीकों और उपचार पद्धतियों से अपडेट रहने में मदद मिलती है।

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