Rajasthan Black Spots: राजस्थान में सड़क दुर्घटनाओं और मौतों को कम करने के लिए जयपुर रेंज पुलिस ने तकनीक आधारित ऑपरेशन सेफर रोड्स शुरू किया है। इस अभियान में 2023 से 2025 तक के सड़क हादसों और उनमें हुई जनहानि के आंकड़ों का विश्लेषण कर जयपुर रेंज के प्रमुख राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर 101 ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए गए हैं। इन स्थानों को Google Maps से जोड़ा गया है, ताकि वाहन चालकों को खतरनाक क्षेत्र में पहुंचने से पहले चेतावनी मिल सके और वे सतर्क होकर वाहन चला सकें।

तीन साल के आंकड़ों का वैज्ञानिक विश्लेषण
जयपुर रेंज के IG राहुल प्रकाश के निर्देशन में वर्ष 2023 से 2025 तक हुए सड़क हादसों और उनमें हुई मौतों के आंकड़ों का विस्तृत अध्ययन किया गया। पुलिस ने दुर्घटनाओं की संख्या के साथ जनहानि को भी विश्लेषण का महत्वपूर्ण आधार बनाया।
इस अध्ययन के बाद जयपुर रेंज के प्रमुख राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर कुल 101 ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए गए। पुलिस ने सभी स्थानों का भौगोलिक सत्यापन भी किया और उनका डिजिटल डेटा तैयार किया।
जोखिम के आधार पर तीन श्रेणियां
जयपुर रेंज पुलिस ने 101 ब्लैक स्पॉट को जोखिम के आधार पर तीन श्रेणियों में बांटा है। जिसमें A श्रेण- 6 हाई रिस्क जोन, B श्रेणी- 32 मीडियम रिस्क जोन, C श्रेणी- 63 लो रिस्क जोन शामिल हैं। Google Maps पर इन ब्लैक स्पॉट की पहचान अलग-अलग रंगों से की जाएगी। लाल रंग हाई रिस्क, नारंगी रंग मीडियम रिस्क और पीला रंग लो रिस्क क्षेत्र को दर्शाएगा। इससे वाहन चालकों को खतरनाक क्षेत्र की जानकारी पहले ही मिल सकेगी।
जयपुर ग्रामीण में सबसे ज्यादा ब्लैक स्पॉट
जयपुर रेंज में सबसे अधिक 28 ब्लैक स्पॉट जयपुर ग्रामीण जिले में चिन्हित किए गए हैं। इसके बाद दौसा में 24 और कोटपूतली-बहरोड़ में 19 ब्लैक स्पॉट हैं।
| जिला | ब्लैक स्पॉट |
|---|---|
| जयपुर ग्रामीण | 28 |
| दौसा | 24 |
| कोटपूतली-बहरोड़ | 19 |
| अलवर | 11 |
| सीकर | 10 |
| भिवाड़ी | 5 |
| खैरथल-तिजारा | 3 |
| झुंझुनूं | 1 |
| कुल | 101 |
पुलिस ने प्रत्येक ब्लैक स्पॉट का भौगोलिक सत्यापन कर डिजिटल डेटा तैयार किया है। इसके बाद इन स्थानों को Google Maps प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है।
QR कोड से भी मिलेगी जानकारी
जयपुर रेंज पुलिस ने अभियान को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए विशेष QR कोड भी जारी किया है। मोबाइल से QR कोड स्कैन कर लोग दुर्घटना संभावित स्थानों की जानकारी हासिल कर सकेंगे। इसमें संबंधित स्थान की जोखिम श्रेणी और सड़क सुरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध होगी।
हादसे के बाद नहीं, पहले मिलेगी चेतावनी
ऑपरेशन सेफर रोड्स का फोकस हादसा होने के बाद कार्रवाई करने के बजाय पहले ही वाहन चालकों को सतर्क करना है। तकनीक की मदद से ब्लैक स्पॉट की जानकारी लोगों तक समय रहते पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। पुलिस का मानना है कि डेटा के वैज्ञानिक विश्लेषण, डिजिटल मैपिंग और सड़क सुरक्षा जागरूकता के इस मॉडल से दुर्घटनाओं और उनमें होने वाली जनहानि को कम करने में मदद मिल सकती है।
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