Rajasthan High Court News: राजस्थान हाईकोर्ट ने बहू और बेटी के बीच के कानूनी फर्क को हमेशा के लिए खत्म करते हुए एक ऐसा फैसला सुनाया है, जिसकी चर्चा पूरे देश में हो रही है। जस्टिस रवि चिरानियां की एकल पीठ ने साफ कर दिया है कि ससुर की मौत के बाद बहू भी अनुकंपा नियुक्ति की उतनी ही हकदार है, जितनी एक बेटी होती है।

PWD विभाग को कड़ी फटकार
दरअसल, यह पूरा मामला सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) से जुड़ा है। विभाग ने तकनीकी अड़ंगेबाजी करते हुए बहू को नौकरी देने से इनकार कर दिया था। इस पर अदालत ने सख्त नाराजगी जताते हुए कहा कि जब साल 2023 में ही डिवीजन बेंच यह साफ कर चुकी है कि बहू को परिवार का हिस्सा माना जाए, तो प्रशासन नई आपत्तियां क्यों निकाल रहा है? कोर्ट ने इसे कानून की मूल भावना के खिलाफ बताया है।
बता दें कि यह याचिका सुंदरी देवी की ओर से लगाई गई थी। उनके ससुर की मौत 2016 में ड्यूटी के दौरान हो गई थी। उस वक्त सुंदरी के पति भी एक हादसे के कारण बिस्तर पर थे। परिवार को संभालने के लिए बहू ने नौकरी की गुहार लगाई, लेकिन सरकारी फाइलों में उसे दबा दिया गया। इस लंबी कानूनी लड़ाई के बीच 2020 में सुंदरी के पति का भी निधन हो गया। हाईकोर्ट ने अब विभाग को आदेश दिया है कि अगले 30 दिनों के भीतर सुंदरी देवी को नियुक्ति पत्र (Appointment Letter) सौंपा जाए।
अफसरों को चेतावनी- 45 दिन में दें रिपोर्ट
गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने इस मामले में सीधे अधिकारियों की जवाबदेही तय कर दी है। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि 45 दिनों के भीतर इस फैसले पर अमल की रिपोर्ट पेश करनी होगी। सूत्रों ने बताया कि जस्टिस चिरानियां ने चेतावनी दी है कि यदि आदेश लागू करने में लापरवाही हुई, तो जिम्मेदार अफसरों के खिलाफ कोर्ट की अवमानना की कार्रवाई की जाएगी।
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