Rajasthan News: राजस्थान में सरकारी नौकरी को लेकर एक ऐसी खबर सामने आई है जिसे सुनकर आप भी माथा पकड़ लेंगे। हाल ही में हुई चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती-2024 के नतीजे जब बाहर आए, तो सब दंग रह गए। हैरानी की बात यह है कि जिन अभ्यर्थियों के परीक्षा में शून्य या माइनस में अंक आए, उन्हें भी सरकारी नौकरी का ऑफर लेटर थमा दिया गया। अब इस मामले ने तूल पकड़ लिया है और राजस्थान हाईकोर्ट ने सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

क्या शून्य अंक वाले सरकारी काम के लिए फिट हैं?
दरअसल, यह पूरा मामला विनोद कुमार नाम के एक अभ्यर्थी की याचिका के बाद सुर्खियों में आया है। सुनवाई के दौरान अदालत ने सरकार से साफ सवाल किया कि जो इंसान परीक्षा में एक भी सही जवाब नहीं दे पाया या जिसके अंक माइनस में हैं, उसे सरकारी पद के लिए योग्य कैसे माना जा सकता है? याचिकाकर्ता ने बताया कि जिस श्रेणी में उसने आवेदन किया था, वहां कट-ऑफ का स्तर 0.0033 तक गिर गया था। हद तो तब हो गई जब बोर्ड ने तर्क दिया कि पद खाली थे, इसलिए जीरो और माइनस अंक वालों को भी नियुक्ति देना मजबूरी थी।
सरकारी बाबू एक-दूसरे पर डाल रहे जिम्मेदारी
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कोर्ट के सख्त रुख के बावजूद सरकारी विभाग अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते नजर आ रहे हैं। अदालत ने जब सामान्य प्रशासन विभाग से जवाब मांगा, तो उन्होंने कह दिया कि हमारा काम तो सिर्फ अभ्यर्थियों का आवंटन करना है। नियम बनाने का जिम्मा तो कार्मिक विभाग और चयन बोर्ड का है। यानी, नियम किसने बनाए और मानक क्यों नहीं तय किए गए, इसका जवाब देने के लिए कोई भी अफसर तैयार नहीं है।
अगली सुनवाई पर गिरेगी गाज
जस्टिस आनंद शर्मा की एकलपीठ इस मामले को लेकर काफी सख्त नजर आ रही है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि योग्यता का कोई तो न्यूनतम मानक होना चाहिए। कोर्ट ने साफ चेतावनी दी है कि अगली सुनवाई, जो कि 7 अप्रैल को होनी है, तब तक अगर जिम्मेदार विभाग ने शपथपत्र पेश नहीं किया, तो सरकार को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। देखना दिलचस्प होगा कि क्या 53 हजार से ज्यादा पदों पर हुई इस बड़ी भर्ती में सरकार कोई ठोस जवाब दे पाती है या फिर योग्यता के मानकों की धज्जियां उड़ती रहेंगी।
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