RPSC Paper Leak: राजस्थान में पेपर लीक का मामला और गहराता जा रहा है। RPSC के पूर्व सदस्य बाबूलाल कटारा ने जिस स्कूल व्याख्याता (कृषि विज्ञान) भर्ती में भ्रष्टाचार किया, उसकी जांच अब उन 50 अभ्यर्थियों तक पहुंच गई है जो फिलहाल नौकरी की तैयारी में थे या सिस्टम का हिस्सा बन चुके थे। SOG की टीम अब एक-एक फाइल खंगाल रही है कि आखिर ये 50 लोग ही पास कैसे हुए?

जांच में जो खुलासा हुआ कि बाबूलाल कटारा ने आयोग के दफ्तर से पेपर चुराया और उसे अपने सरकारी आवास पर ले आया। वहां कोई बाहरी माफिया नहीं, बल्कि उसका अपना भांजा विजय डामोर मौजूद था। कटारा ने विजय से पूरा पेपर एक रजिस्टर में हाथ से लिखवाया ताकि किसी को शक न हो। इसके बाद इस हाथ से लिखे पेपर को माफिया शेर सिंह मीणा को 60 लाख रुपये के मोटे सौदे में बेच दिया गया।
ये खेल सिर्फ पैसों तक सीमित नहीं था। कटारा ने शेर सिंह से डील की थी कि उसे पैसों के साथ-साथ अपने भांजे विजय के लिए भूगोल का पेपर भी चाहिए। शेर सिंह ने वादा निभाया और परीक्षा वाले दिन विजय के मोबाइल पर पेपर भेज भी दिया। लेकिन किस्मत देखिए, विजय मोबाइल चेक किए बिना ही एग्जाम सेंटर के अंदर चला गया और चाचा की इतनी बड़ी सेटिंग के बावजूद पेपर का फायदा नहीं उठा सका।
SOG को सबसे बड़ा शक भर्ती के नतीजों पर हुआ है। कृषि विज्ञान में कुल 280 पद थे, लेकिन हैरानी की बात ये है कि मुख्य लिस्ट में सिर्फ 50 लोग ही पास हो पाए। जांच एजेंसी को लगता है कि ये वही लोग हैं जिन तक पेपर पहुंचाया गया था। अब इन सभी की भूमिका की जांच हो रही है। अगर सबूत मिले, तो इनकी नौकरी जाना तय है।
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