Rajasthan News: चित्तौड़गढ़ पुलिस ने एआई तकनीक का दुरुपयोग कर नकली करेंसी छापने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है. तीनों आरोपी 27 साल के युवक हैं, जिन्होंने ChatGPT और सोशल मीडिया से नकली नोट बनाने का तरीका सीखा और फिर 500 रुपये के हूबहू नोट तैयार कर लिए.

पिछले दिनों त्रिपोलिया चौराहा पर बाइक सवार तीन युवकों को कोतवाली पुलिस ने रोका. तलाशी में उनके पास से 500-500 रुपये के 15 हजार रुपये के नकली नोट बरामद हुए. जांच में सामने आया कि गिरोह का मास्टरमाइंड आसिफ अली है. उसके पास से 13 नकली नोट, आदिल खान से 6 और शाहनवाज खान से 11 नोट मिले. सभी नोटों की सीरीज एक जैसी थी.
पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने कबूल किया कि उन्होंने कम पढ़े-लिखे लोगों को नकली नोट थमाकर धोखा दिया. पहली बार में ही 5 नकली नोट बाजार में चल जाने से उनका आत्मविश्वास बढ़ गया और उन्होंने धड़ल्ले से नोट छापने शुरू कर दिए.
विजयपुर थानाधिकारी प्रभु सिंह चूंडावत ने बताया कि आरोपी सारोला गांव में किराए के मकान में नकली नोट बना रहे थे. मकान मालिक को उन्होंने कहा था कि वे कंप्यूटर का काम करते हैं. छापेमारी में पुलिस को प्रिंटर, खास किस्म का पेपर, स्याही, केमिकल, हरी टेप, सांचा और वाटरमार्क बनाने का फ्रेम मिला.
तीनों युवक चित्तौड़गढ़ किला घूमने आए थे, तभी पुलिस की रडार पर आ गए और गिरोह का राज खुल गया. फिलहाल तीनों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच जारी है.
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