Rajasthan News: आरएसी कांस्टेबल भर्ती परीक्षा 2010-11 में फर्जीवाड़े की जांच अब नए मोड़ पर पहुंच गई है। डमी कैंडिडेट से लिखित परीक्षा दिलाकर नौकरी हासिल करने के आरोप में दर्ज एफआईआर के बाद पुलिस लगातार मामले की जांच कर रही है। इसी दौरान पता चला कि आरोपी आरएसी कांस्टेबल श्रीराम मीणा इन दिनों टोंक जिले के दतवास थाना क्षेत्र के कांटोली गांव में संत श्रीराम महाराज अघोरी के नाम से आश्रम चला रहा है।

पुलिस के अनुसार, श्रीराम मीणा वर्ष 2024 से आरएसी की नौकरी से स्वेच्छा से गैरहाजिर है। उसकी तलाश की जा रही है। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि वह अपने आश्रम के जरिए नशा मुक्ति अभियान चलाने का दावा करता है और सोशल मीडिया पर उसके हजारों फॉलोअर्स हैं। हालांकि पुलिस का कहना है कि आश्रम या उसके धार्मिक गतिविधियां जांच का हिस्सा नहीं हैं। फिलहाल पूरा फोकस भर्ती प्रक्रिया में हुई कथित गड़बड़ी की जांच पर है।
भर्ती के दस्तावेजों की होगी वैज्ञानिक जांच
पुलिस भर्ती से जुड़े सभी दस्तावेज जुटा रही है। आवेदन पत्र, फोटो, हस्ताक्षर और अन्य रिकॉर्ड को फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) भेजा जाएगा। हस्ताक्षरों और दस्तावेजों के मिलान के जरिए यह पता लगाने की कोशिश होगी कि लिखित परीक्षा वास्तव में किसने दी थी।
जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि यह मामला केवल एक अभ्यर्थी तक सीमित था या इसके पीछे कोई संगठित गिरोह सक्रिय था। यदि जांच में अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
2011 की परीक्षा में डमी कैंडिडेट बैठाने का आरोप
पुलिस के अनुसार, वर्ष 2010-11 की आरएसी कांस्टेबल भर्ती में श्रीराम मीणा का परीक्षा केंद्र टोंक शहर का टैगोर बाल निकेतन सीनियर सेकेंडरी स्कूल था। आरोप है कि 23 जनवरी 2011 को हुई लिखित परीक्षा में वह खुद शामिल नहीं हुआ और उसकी जगह किसी अन्य व्यक्ति ने परीक्षा दी। बाद में चयन होने पर उसने दस्तावेज जमा कर नौकरी हासिल कर ली।
एसओजी की प्रारंभिक जांच के बाद 24 जून 2026 को एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू हुई और 30 जून को टोंक के कोतवाली थाने में मामला दर्ज किया गया।
सोशल मीडिया पर समर्थन में उतरे समर्थक
मामला सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर बहस तेज हो गई है। विभिन्न प्लेटफॉर्म पर श्रीराम महाराज अघोरी के समर्थन में बड़ी संख्या में पोस्ट की जा रही हैं। बताया जा रहा है कि उनके 91 हजार से अधिक फॉलोअर्स हैं।
समर्थकों का कहना है कि वह फरार नहीं हैं और अपने आश्रम में ही मौजूद हैं। उनका दावा है कि पुलिस जांच पूरी होने के बाद वह निर्दोष साबित होंगे। वहीं पुलिस का कहना है कि जांच पूरी तरह साक्ष्यों और तकनीकी परीक्षण के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है।
टोंक एसपी रोशन मीणा ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया से जुड़े सभी दस्तावेज, आवेदन पत्र, फोटो और हस्ताक्षर मंगवाए गए हैं। इनका एफएसएल से वैज्ञानिक परीक्षण कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि कांटोली गांव में आश्रम संचालित होने की जानकारी मिली है। पुलिस का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि भर्ती परीक्षा में वास्तव में डमी कैंडिडेट बैठाया गया था या नहीं। उसी आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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