Rajasthan News: राजस्थान में पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार की योजनाओं को रोकने और उनके नाम बदलने के मुद्दे पर सत्ताधारी और विपक्षी दलों के बीच लगातार टकराव जारी है। इसी कड़ी में, पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने जयपुर और जोधपुर में प्रस्तावित दिव्यांग विश्वविद्यालयों के निर्माण को रोकने का आरोप लगाया है। उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से इन विश्वविद्यालयों का काम शीघ्र शुरू कराने की मांग की है।

गहलोत ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि सरकार को केवल दिव्यांग नाम देने से आगे बढ़कर उनके लिए शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विकलांग शब्द को दिव्यांग में बदलकर सम्मान देने की बात करते हैं, जबकि दूसरी ओर उनकी ही पार्टी की सरकार राजस्थान में दिव्यांगों के लिए घोषित विश्वविद्यालयों के कार्य को ठप करके बैठी है।
उच्च शिक्षा में दिव्यांगों की भागीदारी कम
गहलोत ने कहा कि भारत में उच्च शिक्षा में दिव्यांगों की भागीदारी 5% से भी कम है। इसी जरूरत को देखते हुए कांग्रेस सरकार ने बजट 2022-23 में जयपुर में बाबा आम्टे दिव्यांग विश्वविद्यालय और बजट 2023-24 में जोधपुर में महात्मा गांधी दिव्यांग विश्वविद्यालय की घोषणा की थी। चूंकि ये विशेष प्रकृति के विश्वविद्यालय थे, इसलिए इनके पाठ्यक्रम तैयार करने और अन्य औपचारिक प्रक्रियाओं में समय लगना स्वाभाविक था।
वित्तीय सहायता न मिलने का आरोप
गहलोत ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने इन दोनों विश्वविद्यालयों को चुपचाप रोक दिया है। जोधपुर विश्वविद्यालय की वाइस चांसलर कुसुमलता भंडारी लगातार सरकार से स्टाफ और वित्तीय सहायता की मांग कर रही थीं, लेकिन उन्हें कोई मदद नहीं दी गई। उनके निधन के दो महीने बाद भी किसी नए व्यक्ति को यह जिम्मेदारी नहीं सौंपी गई है। इसी तरह, जयपुर विश्वविद्यालय का काम भी ठप पड़ा है।
गहलोत ने मांग की है कि भजनलाल सरकार जल्द से जल्द इन विश्वविद्यालयों के निर्माण कार्य को दोबारा शुरू करे, ताकि दिव्यांग विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने के अधिक अवसर मिल सकें।
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