Rajasthan NHM Scam: साल 2016 के NHM (राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन) घूसखोरी और घोटाले से जुड़े मामले में एसीबी ने शुक्रवार को बड़ी कार्रवाई की। जांच एजेंसी ने तत्कालीन NHM निदेशक आईएएस नीरज के. पवन समेत 5 आरोपियों के खिलाफ एसीबी कोर्ट में चार्जशीट पेश की है। करीब 5 हजार पन्नों के दस्तावेज कोर्ट में पेश किए गए हैं। चार्जशीट दाखिल होते ही लंबे समय से फरार चल रहे आरोपी सुनील राठौड़ ने शुक्रवार दोपहर एसीबी कोर्ट में सरेंडर कर दिया।

मामला स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं के प्रचार-प्रसार के लिए चलाए गए आरोग्य रथ से जुड़ा है। एसीबी के मुताबिक, आरोग्य रथ को कागजों में ज्यादा दिनों तक चलना दिखाकर फर्जी बिल तैयार किए गए और 1 करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान उठा लिया गया। जांच में फर्मों से 17 फीसदी कमीशन वसूले जाने का भी आरोप सामने आया है।

आरोग्य रथ के नाम पर फर्जी बिल तैयार करने का आरोप

एसीबी के एडिशनल एसपी प्रशांत कौशिक के मुताबिक, प्रदेशभर में स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं के प्रचार के लिए आरोग्य रथ चलाए गए थे। जांच में सामने आया कि इन रथों के संचालन से जुड़े रिकॉर्ड में हेरफेर कर फर्जी बिल तैयार किए गए।

आरोप है कि वास्तविक काम की अवधि और रथ के संचालन के दिनों की तुलना में कागजों में कहीं ज्यादा दिन दिखाए गए। इन्हीं फर्जी रिकॉर्ड के आधार पर भुगतान लिया गया। इस मामले में एसीबी ने आईएएस नीरज के. पवन, अकाउंटेंट जोजी वर्गीस, एएओ दीपा गुप्ता, दलाल अजीत सोनी और सुनील राठौड़ के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है।

नीरज के. पवन उस समय NHM निदेशक थे

एसीबी की जांच के मुताबिक, जिस समय यह कथित फर्जीवाड़ा हुआ, उस दौरान नीरज के. पवन NHM में निदेशक थे। उनके खिलाफ अभियोजन स्वीकृति वर्ष 2021 में मिली थी।

जांच में अकाउंटेंट जोजी वर्गीस और एएओ दीपा गुप्ता की भूमिका भी सामने आने का दावा किया गया है। वहीं, अजीत सोनी पर ठेकेदारों से कथित तौर पर घूस की रकम इकट्ठा करने का आरोप है।

आरोग्य रथ के प्रचार-प्रसार का टेंडर सुरेंद्र सिंह की फर्म को मिला था। एसीबी के अनुसार, सुनील राठौड़ की ओर से टेंडर से जुड़े फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और उनके आधार पर भुगतान लिया गया।

फर्मों से 17 फीसदी कमीशन लेने का आरोप

एसीबी के एडिशनल एसपी के अनुसार, NHM घोटाले में फर्मों से 17 फीसदी कमीशन वसूले जाने का आरोप है। इसमें 5 फीसदी टेंडर जारी करने के समय और 12 फीसदी बिलों के भुगतान के दौरान लेने की बात सामने आई है।

जांच के अनुसार, कथित रिश्वत की रकम में 37 फीसदी हिस्सा नीरज के. पवन, 12 फीसदी दीपा गुप्ता, 2 फीसदी अनिल अग्रवाल, 0.45 फीसदी जोजी वर्गीस, 0.40 फीसदी सहायक लेखाधिकारी, 0.25 फीसदी कैशियर और 0.35 फीसदी दलाल अजीत सोनी के हिस्से में जाने का आरोप है।

1.60 करोड़ के बजट को बढ़ाकर 5 करोड़ करने का आरोप

एसीबी जांच में आरोग्य रथ के प्रचार के लिए NHM की IEC ब्रांच के पास उपलब्ध बजट का भी जिक्र है। जांच एजेंसी के मुताबिक, इस काम के लिए शुरुआत में 1.60 करोड़ रुपये का बजट था।

आरोप है कि दलाल अजीत सोनी ने तत्कालीन NHM निदेशक नीरज के. पवन और अन्य अधिकारियों के साथ मिलकर बजट को बढ़ाकर करीब 5 करोड़ रुपये करवा दिया। इसके बाद आरोग्य रथ के संचालन का टेंडर सुरेंद्र इलेक्ट्रोटेक को दिया गया।

3 महीने काम, कागजों में हजारों दिन

एसीबी के अनुसार, संबंधित फर्म ने अक्टूबर से दिसंबर 2015 तक काम किया और विभाग को तीन महीने के बिल पेश किए। इन बिलों में आरोग्य रथ के संचालन की अवधि अलग-अलग तरीके से ज्यादा दिखाई गई।

जांच में यह भी सामने आया कि रिकॉर्ड में 1369 दिन रथ चलने की बात बताई गई, जबकि अधिकारियों और अन्य आरोपियों की मिलीभगत से 2548 दिनों के बिल पास कर भुगतान उठाने का आरोप है। यहीं से पूरे मामले में कथित फर्जीवाड़े की तस्वीर सामने आई।

जांच में सिर्फ 552 दिन संचालन मिला

एसीबी के मुताबिक, जांच के बाद चिकित्सा विभाग ने भी मामले की पड़ताल की। इसमें सामने आया कि तीन महीने की अवधि में आरोग्य रथ वास्तव में केवल 552 दिन ही संचालित हुए थे।

इसके बावजूद फर्म के मालिक, अजीत सोनी, NHM निदेशक नीरज के. पवन, लेखाधिकारी दीपा गुप्ता, अतिरिक्त निदेशक अनिल अग्रवाल और स्टोर कीपर जोजी वर्गीस की भूमिका के जरिए करीब 2 हजार दिनों के फर्जी बिल तैयार कराए गए और 1 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान उठाने का आरोप है।

चार्जशीट के बाद सुनील राठौड़ ने किया सरेंडर

एसीबी ने शुक्रवार को मामले में चार्जशीट दाखिल की। इसमें करीब 5 हजार पन्नों के दस्तावेज कोर्ट के सामने रखे गए हैं। चार्जशीट पेश होने के बाद लंबे समय से फरार आरोपी सुनील राठौड़ ने भी शुक्रवार दोपहर एसीबी कोर्ट में सरेंडर कर दिया।

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