Rajasthan Nikay Chunav 2026: राजस्थान निकाय चुनाव 2026 के नतीजों के बाद निर्विरोध बोर्ड गठन का आंकड़ा भी चर्चा में है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, इस बार 33 नगरीय निकायों में बिना मुकाबले बोर्ड गठित हुए। इनमें 30 बोर्ड बीजेपी के खाते में गए। कांग्रेस को दो निकायों में निर्विरोध जीत मिली, जबकि एक निकाय में बीजेपी समर्थित बोर्ड बना। 2018 से 2023 के दौरान कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में 11 निकायों में निर्विरोध बोर्ड बने थे। इस लिहाज से इस बार का आंकड़ा करीब तीन गुना है।

निर्विरोध बोर्ड के आंकड़ों में बड़ा अंतर

पिछले कांग्रेस शासन के पांच साल में बने 11 निर्विरोध बोर्डों में कांग्रेस के छह, बीजेपी के तीन और निर्दलीयों के दो बोर्ड थे। इस बार 33 निकायों में निर्विरोध बोर्ड बनने के आंकड़े में बीजेपी की हिस्सेदारी सबसे अधिक रही।

हालांकि, निर्विरोध बोर्ड का आंकड़ा पूरे निकाय चुनाव के परिणामों की तस्वीर नहीं बताता। 309 निकायों के चुनाव में बीजेपी ने 4,179 वार्ड जीते, जबकि कांग्रेस के खाते में 3,613 और निर्दलीयों के खाते में 2,273 वार्ड आए। कई निकायों में अध्यक्ष पद के लिए निर्दलीय पार्षदों की भूमिका भी महत्वपूर्ण बनी हुई है।

309 निकायों में हुआ चुनाव

राजस्थान में इस बार 309 नगरीय निकायों में चुनाव कराया गया। इनमें 10 नगर निगम, 51 नगर परिषद और 248 नगरपालिकाएं शामिल हैं। कुल 10,245 पार्षद पदों के लिए मतदान दो चरणों में 9 और 11 सितंबर को हुआ। मतगणना 14 सितंबर को हुई।

पिछले निकाय चुनाव चक्र के मुकाबले इस बार शहरी निकायों की संख्या बढ़ी है। पिछली बार राजस्थान में 196 नगरीय निकायों में चुनाव हुए थे। इस बदलाव के पीछे नए निकायों का गठन, शहरी क्षेत्रों का विस्तार और पुनर्गठन जैसे कारण रहे।

भरतपुर और डीग में निर्विरोध बोर्ड का आंकड़ा चर्चा में

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह संभाग भरतपुर और नवगठित डीग जिले को लेकर भी निर्विरोध बोर्ड के आंकड़े सामने आए हैं। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, इन दोनों क्षेत्रों की करीब 90 प्रतिशत नगरपालिकाओं में बीजेपी अपना बोर्ड बनाने में सफल रही।

हालांकि भरतपुर नगर निगम का नतीजा इस तस्वीर से अलग रहा। यहां 65 वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवारों ने 38 सीटें जीतीं। ऐसे में मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र में अलग-अलग निकायों के परिणामों में काफी अंतर भी देखने को मिला।

बीजेपी के लिए संगठनात्मक आंकड़ा, कांग्रेस के लिए चुनौती

33 निर्विरोध बोर्डों में बीजेपी के 30 बोर्ड बनने के आंकड़े को पार्टी के संगठनात्मक प्रदर्शन से जोड़कर देखा जा रहा है। स्थानीय स्तर पर उम्मीदवारों के बीच सहमति बनाना और चुनावी मुकाबले से पहले समीकरण साधना ऐसे बोर्ड गठन में महत्वपूर्ण रहा होगा, हालांकि प्रत्येक निकाय में इसकी अलग परिस्थितियां रही हैं।

दूसरी ओर, कांग्रेस इस बार सिर्फ दो निकायों में निर्विरोध बोर्ड बना सकी। यही वजह है कि 2018-23 के 11 निर्विरोध बोर्ड के मुकाबले इस बार का आंकड़ा पार्टी के लिए चर्चा का विषय बना हुआ है।

सिर्फ निर्विरोध बोर्ड से पूरी तस्वीर नहीं

निकाय चुनाव के व्यापक नतीजों में बीजेपी और कांग्रेस के बीच मुकाबला कई जगह करीबी रहा। 309 निकायों के 10,244 घोषित परिणामों में बीजेपी को 4,179 वार्ड, कांग्रेस को 3,613 और निर्दलीयों को 2,273 वार्ड मिले।

इसलिए 33 निर्विरोध बोर्ड का आंकड़ा बीजेपी के संगठनात्मक प्रदर्शन का एक पहलू जरूर दिखाता है, लेकिन पूरे राजस्थान के शहरी चुनावी परिणामों को समझने के लिए वार्डवार नतीजे और अलग-अलग निकायों में बने बहुमत के समीकरण भी महत्वपूर्ण हैं।

अब अध्यक्ष-सभापति चुनाव पर नजर

निकाय चुनाव में पार्षदों के नतीजे आने के बाद अब नगर निगमों में महापौर और नगर परिषदों-नगरपालिकाओं में सभापति एवं अध्यक्ष पद के चुनाव की प्रक्रिया पर नजर है। राज्य निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार नगरीय निकायों के प्रमुखों का चुनाव 21 सितंबर को होना है।

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