Rajasthan Nikay Chunav 2026 में बीजेपी ने पूरे राजस्थान में सबसे ज्यादा 4,179 वार्ड जीते हैं। इसके बावजूद पार्टी के लिए भरतपुर, झालावाड़ और पाली के नतीजे अलग तरह से चर्चा में हैं। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह क्षेत्र भरतपुर में निर्दलीय बीजेपी से आगे निकल गए। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के प्रभाव वाले झालावाड़ नगर परिषद में कांग्रेस ने बहुमत हासिल कर लिया। वहीं बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ के गृह जिले पाली में भी कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई है।

भरतपुर में निर्दलीयों ने बिगाड़ा बीजेपी का खेल
भरतपुर नगर निगम में कुल 65 वार्ड हैं। यहां निर्दलीयों ने 36 वार्ड जीत लिए। बीजेपी को 20 और कांग्रेस को 7 वार्ड मिले। बसपा और आरएलपी के खाते में एक-एक सीट गई। नगर निगम में बहुमत के लिए 33 पार्षद चाहिए। निर्दलीय इस आंकड़े से तीन सीट आगे हैं। ऐसे में भरतपुर में बोर्ड गठन का पूरा गणित निर्दलीयों के आसपास घूम रहा है। 16 सितंबर को मेयर पद के लिए बीजेपी की अनुराधा सिंह और निर्दलीय विचित्रा सिंह ने नामांकन दाखिल किया। निर्दलीय प्रत्याशी ने कांग्रेस के समर्थन का दावा भी किया है। ऐसे में आगे की तस्वीर बोर्ड गठन के दौरान ही साफ होगी। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह क्षेत्र का यह नतीजा इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि बीजेपी यहां सबसे ज्यादा सीटें जीतने के बावजूद बहुमत से काफी दूर रह गई।
झालावाड़ में कांग्रेस को साफ बहुमत
झालावाड़ नगर परिषद में 45 वार्ड हैं। यहां कांग्रेस ने 29 वार्ड जीत लिए। बीजेपी को 13 सीटें मिलीं। दो वार्ड निर्दलीयों और एक वार्ड आम आदमी पार्टी के खाते में गया। 29 सीटों के साथ कांग्रेस को साफ बहुमत मिल गया है। यानी बोर्ड बनाने के लिए उसे किसी दूसरी पार्टी या निर्दलीय के सहारे की जरूरत नहीं है। झालावाड़ का नाम वसुंधरा राजे के राजनीतिक प्रभाव वाले इलाकों में लिया जाता है। ऐसे में नगर परिषद में कांग्रेस का बहुमत बीजेपी के लिए चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि पूरे जिले की तस्वीर एक जैसी नहीं है। झालरापाटन में बीजेपी ने अपना प्रदर्शन कायम रखा है। इसलिए झालावाड़ नगर परिषद के नतीजे को पूरे जिले का परिणाम मानना ठीक नहीं होगा।
पाली में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी
प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष मदन राठौड़ के गृह जिले पाली में भी पार्टी अपने दम पर बोर्ड बनाने की स्थिति में नहीं है। पाली नगर निगम के 65 वार्डों में कांग्रेस ने 29 सीटें जीती हैं। बीजेपी के खाते में 21 और निर्दलीयों के खाते में 15 वार्ड आए हैं। यहां बहुमत के लिए 33 सीटें चाहिए। कांग्रेस बहुमत से चार सीट दूर है, जबकि बीजेपी को 12 और सीटों की जरूरत है। ऐसे में 15 निर्दलीय पार्षद बोर्ड गठन में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
तीन जगहों पर अलग-अलग तस्वीर
भरतपुर में निर्दलीयों की संख्या बीजेपी और कांग्रेस दोनों से ज्यादा है। झालावाड़ में कांग्रेस ने सीधे बहुमत हासिल किया है। पाली में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी है, जबकि निर्दलीय भी बड़ी संख्या में जीते हैं। यानी तीनों जगहों पर कहानी अलग है। लेकिन एक बात समान है। इन तीनों निकायों में बीजेपी अपने दम पर बोर्ड बनाने की स्थिति में नहीं है।
राज्य में BJP सबसे आगे, लेकिन इन नतीजों पर नजर
राज्यभर के आंकड़ों में बीजेपी 4,179 वार्ड जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी है। कांग्रेस ने 3,613 और निर्दलीयों ने 2,273 वार्ड जीते हैं। इसलिए भरतपुर, झालावाड़ और पाली के नतीजों को पूरे राजस्थान का जनादेश कहना सही नहीं होगा। निकाय चुनाव में स्थानीय उम्मीदवार, टिकट वितरण, बगावत और वार्ड स्तर के मुद्दे भी नतीजों पर असर डालते हैं। फिर भी बड़े नेताओं के प्रभाव वाले इलाकों में आए ये नतीजे चर्चा में हैं।
अब सवाल यह है कि क्या भरतपुर, झालावाड़ और पाली का यह गणित सिर्फ निकाय चुनाव तक सीमित है, या 2028 विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी के लिए इन इलाकों में संगठन और स्थानीय समीकरणों पर नए सिरे से काम करने का संकेत भी है?
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