Rajasthan Nikay Chunav 2026 के सोमवार को आए 309 नगरीय निकायों के नतीजों ने कांग्रेस के लिए नई चुनौती खड़ी कर दी है। ढाई साल बाद सत्ता में वापसी का दावा कर रही पार्टी को अपने ही कई दिग्गज नेताओं के निर्वाचन क्षेत्रों में हार का सामना करना पड़ा। नतीजों के मुताबिक, कांग्रेस के सिर्फ 9 विधायक और एक सांसद ही ऐसे रहे, जिनके निर्वाचन क्षेत्रों में आने वाले निकायों में पार्टी को स्पष्ट बहुमत मिला। इसके उलट 14 विधायकों और एक सांसद के क्षेत्रों में कांग्रेस को हार मिली है। वहीं 14 अन्य विधायकों के क्षेत्रों में पार्टी बहुमत के लिए जूझ रही है।

इन नतीजों ने कांग्रेस के सामने सिर्फ चुनावी प्रदर्शन का सवाल नहीं खड़ा किया है, बल्कि अपने मजबूत माने जाने वाले क्षेत्रों में संगठन और जनाधार को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। कई जगह भाजपा ने कांग्रेस को पीछे छोड़ा तो कई निकायों में निर्दलीयों ने दोनों प्रमुख दलों का गणित बिगाड़ दिया।
डोटासरा और पायलट ने बचाया अपना गढ़
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट के निर्वाचन क्षेत्रों से पार्टी के लिए राहत की खबर आई है। डोटासरा के निर्वाचन क्षेत्र लक्ष्मणगढ़ में कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत मिला है। उनके गृह जिले सीकर की नगर परिषद में भी कांग्रेस का बोर्ड बनना तय है। वहीं सचिन पायलट के निर्वाचन क्षेत्र टोंक में भी कांग्रेस को पूर्ण बहुमत मिला है। यहां भी पार्टी का बोर्ड बनना तय है।
गहलोत के गृह क्षेत्र जोधपुर में बराबरी का मुकाबला
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के गृह जिले के जोधपुर नगर निगम में कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। यहां भाजपा और कांग्रेस को बराबर सीटें मिली हैं। ऐसे में कांग्रेस के सामने बोर्ड बनाने के लिए जोड़-तोड़ का रास्ता बचता है। यानी गहलोत के गृह क्षेत्र में कांग्रेस के लिए सीधी जीत की तस्वीर नहीं बनी और अब बोर्ड गठन के लिए सियासी गणित महत्वपूर्ण हो गया है।
टीकाराम जूली के क्षेत्र अलवर में निर्दलीय तय करेंगे गणित
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के गृह जिले के अलवर नगर परिषद में भी कांग्रेस बहुमत से दूर रह गई। यहां भाजपा को 28 और कांग्रेस को 23 सीटें मिली हैं। वहीं 13 निर्दलीय प्रत्याशी जीतकर आए हैं। ऐसे में बोर्ड गठन के लिए भाजपा और कांग्रेस दोनों की नजर निर्दलीयों पर है। यहां प्रदेश के वन मंत्री संजय शर्मा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के बीच बोर्ड बनाने को लेकर मुकाबला है।
सिर्फ दो पूर्व मंत्रियों ने बचाई अपनी साख
कांग्रेस के पूर्व मंत्रियों में केवल विश्वेंद्र सिंह और परसादी लाल मीणा अपने-अपने गढ़ में पार्टी को स्पष्ट बहुमत दिलाने में कामयाब रहे। परसादी लाल मीणा के निर्वाचन क्षेत्र लालसोट में कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत मिला है। वहीं विश्वेंद्र सिंह के क्षेत्र डीग में भी कांग्रेस का बोर्ड बनना तय है। इसके विपरीत पूर्व मंत्री जाहिदा खान के निर्वाचन क्षेत्र कामां, उदयलाल आंजना के क्षेत्र निंबाहेड़ा और रमेश मीणा के क्षेत्र सपोटरा में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा।
कांग्रेस के दो सांसदों ने बचाया गढ़, एक के क्षेत्र में हार
कांग्रेस सांसदों के निर्वाचन क्षेत्रों में भी तस्वीर पूरी तरह एक जैसी नहीं रही। बृजेंद्र ओला और मुरारी लाल मीणा अपने गढ़ बचाने में सफल रहे। बृजेंद्र ओला के निर्वाचन क्षेत्र झुंझुनू और मुरारी लाल मीणा के निर्वाचन क्षेत्र दौसा में कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत मिला। दोनों जगह पार्टी का बोर्ड बनना तय है। वहीं राहुल कस्वां के निर्वाचन क्षेत्र चूरू में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा।
14 विधायकों के क्षेत्रों में कांग्रेस के सामने बोर्ड बनाने की चुनौती
कांग्रेस के 14 अन्य विधायकों के निर्वाचन क्षेत्रों में पार्टी ऐसी स्थिति में है जहां उसे बोर्ड बनाने के लिए सियासी जोड़-तोड़ करनी पड़ सकती है। इन निकायों में कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। ऐसे में निर्दलीय पार्षदों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। पार्टी को बोर्ड बनाने के लिए निर्दलीय जीते पार्षदों को अपने पक्ष में लाना होगा। यही वजह है कि निकाय चुनाव के नतीजों के बाद कांग्रेस के भीतर अपने दिग्गजों के क्षेत्रों में प्रदर्शन को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
संगरिया में 25 निर्दलीय, कांग्रेस के खाते में सिर्फ 8 सीटें
कांग्रेस विधायक अभिमन्यु पूनिया के निर्वाचन क्षेत्र संगरिया नगरपालिका में भी बेहद दिलचस्प स्थिति बनी है। यहां कुल 35 वार्ड हैं। भाजपा को 2 और कांग्रेस को सिर्फ 8 सीटें मिली हैं। सबसे बड़ी संख्या निर्दलीय पार्षदों की है। यहां 25 निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव जीतकर आए हैं। ऐसे में बोर्ड गठन में निर्दलीयों की भूमिका सबसे अहम हो गई है।
हिंडौन सिटी में 39 निर्दलीय किंगमेकर
कांग्रेस विधायक अनीता जाटव के निर्वाचन क्षेत्र हिंडौन सिटी की तस्वीर भी कुछ ऐसी ही है। हिंडौन नगर परिषद के 60 वार्डों में भाजपा को 12 और कांग्रेस को 9 सीटें मिली हैं। यहां 39 निर्दलीय पार्षद चुनाव जीतकर आए हैं। ऐसे में बोर्ड गठन का पूरा गणित निर्दलीयों के इर्द-गिर्द घूम रहा है। संगरिया और हिंडौन सिटी में निर्दलीयों की संख्या इतनी ज्यादा है कि दोनों जगह बोर्ड गठन में उनकी भूमिका निर्णायक हो गई है।
दिग्गजों के गढ़ में हार से कांग्रेस के सामने कई सवाल
निकाय चुनाव के नतीजों ने कांग्रेस के लिए एक साथ कई तस्वीरें सामने रख दी हैं। डोटासरा, पायलट, विश्वेंद्र सिंह और परसादी लाल मीणा अपने क्षेत्रों में पार्टी को स्पष्ट बहुमत दिलाने में सफल रहे। लेकिन गहलोत और जूली जैसे दिग्गजों के गृह क्षेत्रों में कांग्रेस बहुमत से दूर रही। इसके अलावा कई मौजूदा और पूर्व विधायकों के क्षेत्रों में पार्टी को हार मिली। कुछ जगह निर्दलीय इतने मजबूत होकर उभरे कि भाजपा और कांग्रेस दोनों को उनके समर्थन की जरूरत पड़ सकती है।
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