Rajasthan Nikay Chunav 2026: राजस्थान में नगरीय निकाय चुनाव के लिए नामांकन के आखिरी दिन सोमवार को प्रदेशभर में अलग-अलग तस्वीरें देखने को मिलीं। कहीं प्रत्याशियों के नाम और पार्टी सिंबल को लेकर असमंजस रहा, तो कहीं टिकट नहीं मिलने पर नेताओं ने बगावत का रास्ता अपनाया। सीकर के फतेहपुर शेखावाटी में नामांकन के दौरान दो गुटों के बीच खूनी संघर्ष हो गया, जिसमें कई लोग घायल हुए। भरतपुर में भाजपा की महिला प्रत्याशी की पुलिस से तीखी नोकझोंक हुई, जबकि कुछ उम्मीदवार समय पर नहीं पहुंच पाने के कारण नामांकन दाखिल नहीं कर सके।

नगर निकाय चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने का समय सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक निर्धारित था। बीजेपी और कांग्रेस ने कई जगहों पर आखिरी समय तक प्रत्याशियों के नाम घोषित नहीं किए। दोनों दलों की ओर से कई स्थानों पर सीधे पार्टी सिंबल पहुंचाए गए। इसके चलते नामांकन केंद्रों पर उम्मीदवारों और समर्थकों के बीच असमंजस की स्थिति भी देखने को मिली।
जयपुर में एक वार्ड, दो दावेदार और सिंबल को लेकर असमंजस
जयपुर नगर निगम के वार्ड नंबर 76 में भाजपा के टिकट को लेकर आखिरी समय तक असमंजस बना रहा। पार्टी ने पहले पूर्व डिप्टी मेयर पुनीत कर्णावट को टिकट दिया था। वहीं मालवीय नगर विधायक कालीचरण सराफ ने कुलदीप मिश्रा को अधिकृत सिंबल दे दिया।
सिंबल मिलने के बाद कुलदीप मिश्रा ने वार्ड 76 से भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी के तौर पर नामांकन दाखिल किया। विधायक कालीचरण सराफ का कहना था कि पहले कुलदीप मिश्रा का नाम तय हुआ था, लेकिन बाद में प्रत्याशी बदल दिया गया। उनके मुताबिक प्रत्याशी बदलने से पहले ही कुलदीप मिश्रा को सिंबल दिया जा चुका था। इस घटनाक्रम के चलते वार्ड 76 में भाजपा के टिकट को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी।
जयपुर की निवर्तमान मेयर कुसुम यादव का भी टिकट कट गया। उनकी जगह पूर्व भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष सुनील कोठारी को वार्ड नंबर 112 से टिकट दिया गया। वहीं मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के ओएसडी आनंद शर्मा की पत्नी प्रतिभा शर्मा को वार्ड नंबर 87 से भाजपा ने प्रत्याशी बनाया है।
एक ही नाम के दो उम्मीदवार, सिंबल पर मचा हंगामा
जयपुर के वार्ड नंबर 101 में भी भाजपा के प्रत्याशी और सिंबल को लेकर विवाद सामने आया। पार्टी की सूची में रविशंकर शर्मा का नाम होने के बावजूद सिंबल नहीं मिलने से स्थिति उलझ गई। नामांकन केंद्र पर एक ही नाम के दो रविशंकर शर्मा पहुंच गए। दोनों ने अपनी-अपनी दावेदारी पेश की। नामांकन का समय खत्म होने में करीब 30 मिनट बाकी रहने के बावजूद विवाद का समाधान नहीं हो सका।
बाद में रविशंकर शर्मा पुत्र छगनलाल शर्मा को टिकट मिलने की बात सामने आई, लेकिन इसके कुछ ही देर बाद मामला फिर गरमा गया। कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि पार्टी की ओर से पहुंचे व्यक्ति ने अपनी मर्जी से गलत व्यक्ति को सिंबल दे दिया। हंगामा बढ़ने पर पुलिस को अतिरिक्त जाब्ता बुलाना पड़ा। दोनों दावेदार नामांकन केंद्र के बाहर खड़े रहे और पीठासीन अधिकारी के फैसले का इंतजार करते रहे।
एक रविशंकर शर्मा ने कहा कि दोनों भाई हैं और एक ही पार्टी के कार्यकर्ता हैं। उन्होंने दावा किया कि सिंबल उन्हें मिला और उन्होंने नामांकन जमा कर दिया। वहीं दूसरे रविशंकर शर्मा ने आरोप लगाया कि सिंबल गलत व्यक्ति को दिया गया और गलत जानकारी के साथ आवेदन जमा कराया गया।
टिकट नहीं मिला तो भाजपा नेता ने निर्दलीय भरा पर्चा
नामांकन के आखिरी दिन भाजपा की सूची जारी होने के बाद पार्टी के भीतर नाराजगी भी सामने आई। भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चे के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव हेमंत पबड़ी ने टिकट नहीं मिलने पर पार्टी के खिलाफ जाकर निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर नामांकन दाखिल किया। पबड़ी ने वार्ड नंबर 96 से निर्दलीय नामांकन भरा। इस दौरान उन्होंने सिविल लाइन विधायक पर भी आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि विधायक को उसके किए की सजा भुगतनी होगी।
फतेहपुर में नामांकन के बाद दो गुट भिड़े
सीकर जिले के फतेहपुर शेखावाटी में नगर निकाय चुनाव के नामांकन के दौरान दो गुटों के बीच खूनी संघर्ष हो गया। बताया गया कि प्रत्याशी नामांकन फॉर्म भरने के बाद बाहर निकले थे। इसी दौरान अचानक दो गुट आमने-सामने आ गए और मारपीट शुरू हो गई। जानकारी के मुताबिक हमलावर पहले से ही परिसर में घात लगाकर बैठे हुए थे। उनके हाथों में धारदार हथियार होने की बात भी सामने आई है। अचानक हुए हमले से मौके पर अफरा-तफरी मच गई। आसपास मौजूद लोगों ने घायलों को संभाला और उपचार के लिए ट्रॉमा सेंटर पहुंचाया। घटना के बाद मौके पर तनाव की स्थिति बन गई।
आखिरी दिन कई जगह रही टिकट को लेकर खींचतान
राजस्थान निकाय चुनाव के नामांकन के आखिरी दिन सामने आई इन घटनाओं से साफ है कि टिकट वितरण को लेकर पार्टियों में आखिरी समय तक खींचतान बनी रही। कई जगह प्रत्याशियों को अंतिम समय में पार्टी का सिंबल मिला, तो कुछ जगह नाम और सिंबल को लेकर विवाद खड़ा हो गया। टिकट नहीं मिलने से नाराज कुछ नेताओं ने निर्दलीय मैदान में उतरने का फैसला किया। वहीं नामांकन केंद्रों पर समर्थकों की भीड़ और प्रत्याशियों के बीच बनी असमंजस की स्थिति ने आखिरी दिन चुनावी माहौल को और गर्म कर दिया।
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