Rajasthan Nikay Chunav 2026 में सीकर जिले की 14 निकायों के नतीजों ने वोट शेयर की अलग तस्वीर सामने रखी है। जिले में कांग्रेस को भाजपा से करीब 34 हजार ज्यादा वोट मिले हैं। वहीं 110 निर्दलीय प्रत्याशियों ने करीब 1.21 लाख वोट हासिल किए।
फतेहपुर, रींगस समेत कई निकायों में निर्दलीयों ने भाजपा और कांग्रेस दोनों के वोट गणित को प्रभावित किया। सीकर नगर परिषद में कांग्रेस को 38 सीटों के साथ स्पष्ट बहुमत मिला, जबकि भाजपा 22 सीटों पर रही। चार सीटों पर निर्दलीय और एक सीट पर RLP प्रत्याशी जीता।

जिले में कांग्रेस को 34 हजार ज्यादा वोट
निर्वाचन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक सीकर जिले की 14 निकायों में कांग्रेस को कुल 1,72,729 वोट मिले। भाजपा के खाते में 1,38,619 वोट आए। इस तरह दोनों प्रमुख दलों के बीच करीब 34 हजार वोटों का अंतर रहा। निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी बड़ी संख्या में वोट हासिल किए। जिले में निर्दलीयों को कुल 1,21,724 वोट मिले। RLP को 6,208, माकपा को 4,665, बसपा को 475 और आम आदमी पार्टी को 396 वोट मिले। जिले की 14 निकायों में कुल 495 वार्ड हैं। इन आंकड़ों से साफ है कि मुकाबला सिर्फ भाजपा और कांग्रेस तक सीमित नहीं रहा। कई निकायों में निर्दलीयों ने दोनों प्रमुख दलों के वोट शेयर को प्रभावित किया।
सीकर नगर परिषद में कांग्रेस का बहुमत
सीकर नगर परिषद के 65 वार्डों में कांग्रेस ने 38 सीटें जीती हैं। भाजपा को 22 सीटें मिलीं। चार वार्ड निर्दलीयों के खाते में गए, जबकि एक सीट RLP ने जीती। वोट शेयर की बात करें तो सीकर नगर परिषद में कांग्रेस को 74,604 वोट मिले। भाजपा को 53,955 वोट मिले। निर्दलीयों के खाते में 29,756 वोट गए। RLP को 3,658 वोट मिले। माकपा को 1,004 और NOTA को 1,229 वोट मिले। यानी सीकर नगर परिषद में कांग्रेस को सीटों के साथ-साथ कुल वोटों में भी भाजपा पर बढ़त मिली। हालांकि 2019 के मुकाबले कांग्रेस का वोट शेयर घटा है।
भाजपा का वोट शेयर बढ़ा, फिर भी बहुमत नहीं
2019 के निकाय चुनाव में सीकर नगर परिषद में भाजपा का वोट शेयर 28.19 प्रतिशत था। इस बार भाजपा के वोट शेयर में करीब 4 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके बावजूद भाजपा बहुमत के आंकड़े तक नहीं पहुंच सकी। दूसरी तरफ कांग्रेस ने पिछली बार के मुकाबले दो सीटें ज्यादा जीतीं, लेकिन उसका वोट शेयर घटा है। 2019 में कांग्रेस का वोट शेयर 46.16 प्रतिशत था, जो इस बार 45 प्रतिशत रहा। अन्य पार्टियों और निर्दलीयों के वोट शेयर में भी बदलाव आया। 2019 में अन्य दलों और निर्दलीयों का संयुक्त वोट शेयर 25.65 प्रतिशत था। इस बार यह करीब 18 प्रतिशत रहा।
10 निकायों में बोर्ड गठन का गणित उलझा
सीकर जिले की 14 निकायों में से 10 निकायों में भाजपा या कांग्रेस को स्पष्ट जनादेश नहीं मिला है। ऐसे में बोर्ड गठन के लिए दोनों दलों की नजर निर्दलीय पार्षदों पर है। मंगलवार को सीकर नगर परिषद में भाजपा की बाड़ाबंदी खत्म हुई। भाजपा के पार्षद पूर्व नेता प्रतिपक्ष अशोक चौधरी की अगुवाई में नगर परिषद कार्यालय पहुंचे। यहां निर्वाचन अधिकारी ने विजेता पार्षदों को शपथ दिलाई और प्रमाण पत्र दिए। सभापति पद के लिए भाजपा की ओर से नाम तय करने को लेकर भी चर्चा जारी रही। पार्टी के तीन नामों के पैनल में से दो नामों पर ज्यादा चर्चा होने की बात सामने आई है।
निर्दलीयों पर दोनों दलों की नजर
जिन निकायों में स्पष्ट बहुमत नहीं है, वहां भाजपा और कांग्रेस दोनों ही बोर्ड गठन के लिए निर्दलीय पार्षदों से संपर्क कर रहे हैं। फतेहपुर और रींगस समेत कई निकायों में निर्दलीयों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है।
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