Rajasthan Nikay Chunav Women Reservation: राजस्थान में आगामी निकाय चुनावों में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण लागू होगा। राज्य के 309 शहरी स्थानीय निकाय प्रमुख पदों में से 102 पद महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं।
इनमें 188 सामान्य पदों में 62, 60 OBC पदों में 21, 50 SC पदों में 16 और 11 ST पदों में 3 पद महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। खास बात यह है कि 10 नगर निगमों में से 6 में महिला मेयर बनेंगी। ऐसे में निकाय चुनावों के जरिए महिला नेतृत्व को बढ़ावा देने की बीजेपी की रणनीति भी चर्चा में है।

10 में से 6 नगर निगमों में महिला मेयर
निकाय चुनाव की लॉटरी में अजमेर, अलवर, भीलवाड़ा, पाली, कोटा और भरतपुर नगर निगमों के मेयर पद महिलाओं के लिए आरक्षित हुए हैं। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह क्षेत्र भरतपुर में भी महिला मेयर बनेगी।
बीजेपी इस आरक्षण को नारी शक्ति वंदन अधिनियम और जमीनी स्तर पर महिला नेतृत्व तैयार करने की अपनी रणनीति से जोड़ रही है। पार्टी की नजर सिर्फ मौजूदा निकाय चुनावों पर नहीं है। पंचायत और निकाय चुनावों के जरिए महिला नेताओं को तैयार करने की यह कवायद 2028 के विधानसभा और 2029 के लोकसभा चुनावों की तैयारी से भी जोड़कर देखी जा रही है।
यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा कि संसद में महिलाओं के आरक्षण को लेकर प्रयास हुए हैं। प्रधानमंत्री ने भी इसके लिए प्रयास किए, लेकिन विपक्ष के सहयोग नहीं मिलने के कारण मामला लंबित है। उन्होंने कहा कि नगर निकाय चुनावों में 33 फीसदी महिला आरक्षण लागू किया गया है और 10 में से 6 नगर निगमों में महिला मेयर होंगी।
महिला नेतृत्व को लेकर बीजेपी का जोर
राजसमंद से बीजेपी विधायक दीप्ति माहेश्वरी ने कहा कि महिला प्रतिनिधित्व पार्टी की प्राथमिकता रही है। उन्होंने कहा कि महिलाओं का नजरिया कई मामलों में अलग होता है और वे उन मुद्दों को भी देख पाती हैं, जो पुरुष प्रतिनिधियों की नजर से छूट सकते हैं।
उन्होंने अस्पतालों के निरीक्षण का उदाहरण देते हुए कहा कि महिला प्रतिनिधि महिला वार्ड में स्वच्छता और हाइजीन जैसी चीजों को अलग नजरिए से देखती हैं। उनके मुताबिक महिलाओं में महिलाओं के प्रति सहज समझ और सहानुभूति होती है, जिससे वे कई मुद्दों को बेहतर तरीके से समझ सकती हैं।
भरतपुर में महिला नेतृत्व को बड़ा संदेश बता रही बीजेपी
कामां से बीजेपी विधायक नौक्षम चौधरी ने भरतपुर और डीग में महिला नेतृत्व को महत्वपूर्ण बदलाव बताया। उन्होंने कहा कि लॉटरी के बाद भरतपुर में महिला नेतृत्व का रास्ता खुला है और डीग में भी पहली बार महिला जिला प्रमुख बनेगी।
नौक्षम चौधरी ने इसे महिलाओं को राजनीति में आगे आने का अवसर देने वाला बड़ा संदेश बताया। उन्होंने कहा कि 2028 का विधानसभा चुनाव उनके लिए एक तरह से सेमीफाइनल है और मुख्यमंत्री के जिले में महिला प्रमुख बनना बड़ा संदेश देगा।
विधानसभा और संगठन में महिलाओं की हिस्सेदारी
हालांकि विधानसभा और पार्टी संगठन में महिलाओं की भागीदारी के आंकड़े अभी तस्वीर का दूसरा पहलू दिखाते हैं। 2023 के राजस्थान विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 28 महिलाओं को टिकट दिया था, जो उसके कुल टिकटों का 14.1 फीसदी था। बीजेपी ने 20 महिलाओं को टिकट दिया, जो उसके कुल टिकटों का 10 फीसदी था।
200 सदस्यीय राजस्थान विधानसभा में फिलहाल 18 महिला विधायक हैं। इनमें बीजेपी और कांग्रेस के अलावा दो निर्दलीय महिला विधायक भी शामिल हैं।
बीजेपी की स्टेट वर्किंग कमेटी में 154 सदस्यों में 20 महिलाएं हैं। यानी समिति में महिलाओं की भागीदारी करीब 13 फीसदी है। वहीं राजस्थान के 50 से अधिक संगठनात्मक जिलों में रोजमर्रा के प्रशासनिक और संगठनात्मक नेतृत्व में 85 फीसदी से अधिक पदों पर पुरुषों का दबदबा होने का दावा किया गया है।
बीजेपी-कांग्रेस आमने-सामने
महिला प्रतिनिधित्व को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच सियासी बयानबाजी भी तेज है। सामाजिक न्याय मंत्री अविनाश गेहलोत ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि बीजेपी मातृ शक्ति के सम्मान की बात करती है, जबकि कांग्रेस में सोनिया गांधी के नेतृत्व को लेकर उन्होंने सवाल उठाए।
वहीं कांग्रेस के बायतू विधायक हरीश चौधरी ने बीजेपी पर महिलाओं का अपमान करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि महिलाओं का भविष्य शिक्षा और रोजगार से बनेगा और राजस्थान सरकार ने महिलाओं का भविष्य कुचल दिया है।
309 निकायों में 102 महिला प्रमुख
- सामान्य/अनारक्षित: 188 में से 62 पद महिलाओं के लिए
- OBC: 60 में से 21 पद OBC महिलाओं के लिए
- SC: 50 में से 16 पद SC महिलाओं के लिए
- ST: 11 में से 3 पद ST महिलाओं के लिए
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