Rajasthan Politics: मारवाड़ की तपती रेत पर इस वक्त सिर्फ सूरज की गर्मी नहीं, बल्कि सियासत का पारा भी हाई है। राजस्थान की सत्ता का रास्ता इसी मारवाड़ से होकर गुजरता है और शायद यही वजह है कि अचानक कांग्रेस के तमाम सूरमाओं ने इस अंचल की ओर रुख कर लिया है। भले ही रिफाइनरी का उद्घाटन टल गया हो, लेकिन कांग्रेस ने इसे सरकार को घेरने का बड़ा मुद्दा बना लिया है।

21% सीटों का गणित, इसलिए मारवाड़ बना हॉटस्पॉट
सियासी गलियारों में चर्चा है कि राजस्थान विधानसभा की 200 सीटों में से करीब 21 फीसदी सीटें अकेले इसी अंचल से आती हैं। यानी जिसने मारवाड़ जीत लिया, जयपुर की गद्दी उसकी पक्की! यही कारण है कि बीजेपी के मदन राठौड़ और सीएम भजनलाल शर्मा की सक्रियता के तुरंत बाद कांग्रेस ने अपने सबसे बड़े मोहरों गोविंद सिंह डोटासरा, टीकाराम जूली और सचिन पायलट को मैदान में उतार दिया है।
बाड़मेर-जैसलमेर में डोटासरा का डंका, जूली ने भी कसी कमर
पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा जब बाड़मेर पहुंचे, तो कार्यकर्ताओं का हुजूम उमड़ पड़ा। सूत्रों की मानें तो कार्यकर्ताओं ने बंद कमरे में डोटासरा से साफ कह दिया कि साहब, पहले संगठन की आपसी खींचतान खत्म करो, तभी चुनाव जीतेंगे। उधर, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने पाली और सिरोही में डेरा डालकर सरकार की दुखती रग पर हाथ रख दिया। जूली ने सीधे तौर पर रिफाइनरी के टलते उद्घाटन और निकाय चुनावों को लेकर बीजेपी को घेरा है।
पायलट का विमान अटका, पर गहलोत की दिल्ली वाली चाल रही फिट
इस पूरे ड्रामे के बीच सचिन पायलट का सांचौर दौरा तकनीकी खराबी की वजह से रद्द हो गया, जिससे उनके समर्थकों में थोड़ी मायूसी दिखी। लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा पूर्व सीएम अशोक गहलोत की हो रही है। गहलोत भले ही मारवाड़ के दौरों पर शारीरिक रूप से मौजूद न हों, लेकिन दिल्ली दरबार में राहुल गांधी के साथ उनकी हालिया तस्वीर ने विरोधियों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। गहलोत ने साफ संदेश दे दिया है कि मारवाड़ में कांग्रेस थोड़ी कमजोर जरूर हुई है, लेकिन जादूगर की नजर एक-एक सीट पर जमी है।
मारवाड़ की जनता के बीच सुगबुगाहट
जोधपुर के भीतरी शहर और बाड़मेर के चौराहों पर अब एक ही बात चल रही है कि क्या कांग्रेस की यह एकजुटता सिर्फ दौरों तक सीमित है या चुनाव तक टिकेगी? गहलोत और पायलट का हाथ मिलाना कार्यकर्ताओं के लिए राहत की खबर तो है, लेकिन जमीन पर इनके समर्थक कब एक होंगे, यह बड़ा सवाल है। फिलहाल, मारवाड़ की धरती पर सियासी बिसात बिछ चुकी है और आने वाले दिन काफी दिलचस्प होने वाले हैं।
पढ़ें ये खबरें
- बस एक कॉल से होगी हेल्प! नेपाल में फंसे UP के लोगों के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी, CM योगी ने अधिकारियों को दिए अहम निर्देश
- अनाथ युवती से रिश्वत और डर्टी चैट करने वाला पटवारी सस्पेंड! खबर का बड़ा असर; होटल बुलाने का लगा था आरोप
- रायपुर के परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़: खाना खाते ही 3 बेटियों की मौत; इंदौर से शव लाते समय तीसरी ने रास्ते में तोड़ा दम!
- BJP मुख्यालय में सत्ता और संगठन के बीच तालमेल बैठाने 11 घंटे तक चली मैराथन बैठक, कई जिलों से सामने आई खुलकर नाराजगी
- घोषणा पर सियासी घमासानः सपा के महिलाओं को 40 हजार रुपए देने वाले ऐलान को केशव मौर्य ने बताया छलावा, अखिलेश को लेकर कह दी बड़ी बात

