चंडीगढ़: कांग्रेस सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने अयोध्या स्थित श्री राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी, गबन और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर चर्चा की मांग को लेकर राज्यसभा में नियम 267 के तहत कार्य स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया है। उन्होंने राज्यसभा के सभी निर्धारित कामकाज को स्थगित कर इस बेहद जरूरी और गंभीर मुद्दे पर तत्काल चर्चा कराने और सरकार की जवाबदेही तय करने की मांग की है।

सुरजेवाला ने अपने नोटिस में आरोप लगाया कि श्री राम मंदिर में दान और चढ़ावे की कथित चोरी, लूट और गबन का मामला करोड़ों भक्तों की आस्था से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित श्री राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्यों और उनके अधीन कार्यरत कर्मचारियों की कथित जिम्मेदारी और जवाबदेही से भी जुड़ा है।

कांग्रेस सांसद ने कहा कि 9 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या में श्री राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ करते हुए केंद्र सरकार को ट्रस्ट गठित करने का निर्देश दिया था। इसके बाद 5 फरवरी 2020 को श्री राम जन्मभूमि ट्रस्ट का गठन किया गया। लाखों श्रद्धालुओं ने मंदिर निर्माण के लिए हजारों करोड़ रुपये का दान दिया।

आस्था की आड़ में चोरी और लूट का आरोप

सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि अब ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनसे प्रतीत होता है कि आस्था की आड़ में राम मंदिर निर्माण और चढ़ावे में कथित तौर पर चोरी और लूट हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ ‘छोटी मछलियों’ को आगे कर बड़ी मछलियों को बचाने की कोशिश की जा रही है।

उन्होंने कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट द्वारा खरीदी गई जमीन में कथित अनियमितताओं और गबन, मंदिर निर्माण में 40 प्रतिशत तक कथित कमीशन, भक्तों द्वारा दान किए गए सोने-चांदी, आभूषणों, रत्नों और अन्य कीमती वस्तुओं के कथित गबन के गंभीर आरोप सामने आए हैं।

सुरजेवाला ने सिंधी समुदाय द्वारा दान की गई 200 से अधिक चांदी की ईंटों के कथित तौर पर गायब होने और परिवार के आभूषणों को पिघलाकर दान की गई रामचरितमानस के कथित रूप से गायब होने के आरोपों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ऐसे सैकड़ों मामले सामने आ सकते हैं और निष्पक्ष जांच से पूरी सच्चाई सामने आनी चाहिए।

जांच और FIR को लेकर भी उठाए सवाल

कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि राम मंदिर में कथित गबन और चोरी के मामलों में पहले SIT गठित की गई और काफी समय बाद FIR दर्ज की गई। उन्होंने कहा कि वर्ष 2021 में भी गबन से जुड़े तथ्य सामने आने के बाद जांच शुरू की गई थी, लेकिन आज तक उसका कोई स्पष्ट परिणाम सामने नहीं आया।

उन्होंने आरोप लगाया कि दर्ज FIR में केवल कुछ छोटे स्तर के लोगों के नाम शामिल किए गए, जबकि असली जिम्मेदार लोगों को बचाया गया। सुरजेवाला ने सवाल उठाया कि न तो ट्रस्ट को भंग किया गया, न ही उसकी जवाबदेही तय की गई और न ही ट्रस्ट के सदस्यों के खिलाफ FIR दर्ज की गई।

सुरजेवाला ने कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट का गठन केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत किया था। ऐसे में सरकार और ट्रस्ट दोनों की जिम्मेदारी और जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने राज्यसभा में इस पूरे मामले पर विस्तृत चर्चा कराने और सरकार व ट्रस्ट की जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की है।