मयंक श्रीवास्तव, अयोध्या. राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण ने एक बार फिर नया मोड़ ले लिया है. मामले की जांच पूरी होने के बाद बुधवार को पुलिस ने जेल में निरुद्ध सभी आठ आरोपियों के खिलाफ अदालत में अपनी चार्जशीट (आरोप पत्र) दाखिल कर दी. पुलिस द्वारा चार्जशीट दाखिल किए जाने की खबर मिलते ही अधिवक्ताओं में भारी नाराजगी फैल गई और उन्होंने तुरंत कार्य बहिष्कार करने का फैसला लिया. अधिवक्ताओं का स्पष्ट रूप से कहना है कि अदालत द्वारा पुलिस की चार्जशीट पर संज्ञान (Cognizance) लेने से पहले उनकी आपत्तियों पर सुनवाई होनी चाहिए. इस मांग को लेकर काफी समय तक कोर्ट परिसर में गहमागहमी और तनावपूर्ण माहौल बना रहा.

परिसर में बढ़ते तनाव को देखते हुए जिला जज ने मध्यस्थता की, जिसके बाद अधिवक्ताओं का गुस्सा शांत हुआ और वे वापस विशेष न्यायाधीश की अदालत पहुंचे. इस दौरान पांच अधिवक्ता कोर्ट रूम के अंदर गए, जबकि अन्य अधिवक्ता बाहर ही मौजूद रहे. कोर्ट के भीतर पहुंचकर वकीलों ने पेश की गई चार्जशीट का अध्ययन किया. उल्लेखनीय है कि अधिवक्ताओं ने चढ़ावा चोरी मामले में राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े पूर्व महासचिव चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्र और गोपाल राव के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग को लेकर पहले ही पुलिस को तहरीर सौंप रखी है.

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पुलिस द्वारा अदालत में दाखिल की गई चार्जशीट में जेल में बंद निम्नलिखित आठ आरोपियों के खिलाफ आरोपों का सिलसिलेवार उल्लेख किया गया है.. जिसमे टिन्नू यादव,​करुणेश,​मनीष,​सुभाष चंद्र श्रीवास्तव,​रमाशंकर,​अनुकल्प मिश्र,​लवकुश मिश्र ​एवं एक अन्य आरोपी..​अब इस बात को लेकर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं कि चार्जशीट में राम मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों और संबंधित बैंककर्मियों की भूमिका को लेकर पुलिस ने क्या तथ्य और निष्कर्ष दर्ज किए हैं.

​बार एसोसिएशन का पक्ष और कोर्ट की मोहलत

अयोध्या बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कलिका मिश्र ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि वकीलों की कमेटी के सदस्यों ने अदालत के समक्ष उपस्थित होकर अपनी दलीलें और आपत्तियां मजबूती से रखी हैं. कोर्ट ने वकीलों को दोपहर 1:30 बजे तक अपनी बात विस्तार से रखने का समय दिया है और तब तक चार्जशीट पर संज्ञान लेने के फैसले को स्थगित रखा है.​वकीलों का मुख्य विरोध इस बात को लेकर है कि पुलिस की जांच और चार्जशीट में अधिवक्ताओं द्वारा दिए गए हलफनामे (Affidavit) और बयानों का कहीं भी जिक्र या तज़किरा नहीं किया गया है. वकीलों का गंभीर आरोप है कि पुलिस असली दोषियों को बचा रही है. अधिवक्ताओं ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष सुनवाई करते हुए चंपत राय और गोपाल राव समेत ट्रस्ट के अन्य प्रमुख पदाधिकारियों को भी अदालत द्वारा तलब किया जाए.