Ramgarh Dargah Case: सीमावर्ती क्षेत्र में चल रहे ऑपरेशन बॉर्डर क्लीन के तहत मेहमूद शाह पीर जिलानी दरगाह से जुड़े मामले में मंगलवार को उपनिवेशन तहसील कार्यालय रामगढ़-द्वितीय में सुनवाई हुई। इस दौरान दरगाह प्रबंधन की ओर से दस्तावेज और न्यायालय से संबंधित आदेश प्रस्तुत किए गए।

दस्तावेजों की प्रारंभिक जांच के बाद प्रशासन ने पूरे मामले की विस्तृत जांच कराने का निर्णय लिया है। उपनिवेशन तहसीलदार ज्ञान सिंह भाटी ने हल्का पटवारी को भूमि रिकॉर्ड की जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए सात दिन की समयसीमा तय की गई है।

250 साल पुरानी दरगाह होने का दावा

रामगढ़-तनोट बाईपास क्षेत्र में स्थित इस दरगाह को करीब 250 वर्ष पुराना बताया जाता है। 0 से 50 किलोमीटर बॉर्डर क्लीन अभियान के तहत प्रशासन की ओर से इसे नोटिस जारी कर भूमि और निर्माण से जुड़े दस्तावेज मांगे गए थे। प्रशासन ने 22 जून तक दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे और चेतावनी दी थी कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

सुनवाई के दौरान मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधियों ने दावा किया कि दरगाह कब्रिस्तान की वैध भूमि के भीतर स्थित है और यह लंबे समय से धार्मिक आस्था का केंद्र रही है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में निर्णय जिला कलेक्टर स्तर पर लिया जाना चाहिए।

जमीन सीमा और स्थिति की जांच जारी

तहसीलदार के अनुसार, यह जांच का विषय है कि संरचना वास्तव में कब्रिस्तान की सीमा के भीतर है या बाहर। दस्तावेजों और रिकॉर्ड का परीक्षण जारी है और टीम को मौके पर पैमाइश के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि 30 जून तक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर ली जाएगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई और अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

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