Business Desk – RBI Bulk Deposit Rule Explained : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बल्क डिपॉजिट (Bulk Deposit) को लेकर बड़ा फैसला लिया है। अब बैंक बल्क डिपॉजिट पर अलग-अलग ब्याज दर (Differential Interest Rate) ऑफर कर सकेंगे। यह व्यवस्था लिक्विडिटी कवरेज रेशियो (LCR) फ्रेमवर्क के तहत बैंक के स्पेसिफिक रन-ऑफ रेट्स के आधार पर लागू होगी। इससे बैंकों को बड़े निवेशकों और संस्थानों से ज्यादा डिपॉजिट जुटाने में आसानी होगी।

किन डिपॉजिट पर लागू होगा नया नियम?

RBI ने नोटिफिकेशन में कहा है कि यह नियम घरेलू रुपये (Domestic Rupee Deposits) और NRI Bulk Deposits दोनों पर लागू होगा। हालांकि, बल्क डिपॉजिट से जुड़े बाकी सभी नियम पहले की तरह ही प्रभावी रहेंगे। यानी केवल ब्याज दर तय करने के तरीके में बदलाव किया गया है।

सभी शाखाओं में एक जैसी ब्याज दर देना होगी जरूरी

RBI ने साफ किया है कि बैंक किसी ग्राहक या किसी शाखा के आधार पर अलग-अलग ब्याज दर नहीं दे सकेंगे। जिस श्रेणी के बल्क डिपॉजिट पर जो ब्याज दर तय होगी, वही दर बैंक की सभी शाखाओं में लागू होगी। साथ ही हर बैंक को रोज सुबह 10 बजे तक अपनी शाखाओं में बल्क डिपॉजिट की ब्याज दर सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करनी होगी, ताकि ग्राहकों को पूरी पारदर्शिता मिल सके।

Bulk Deposit क्या होता है?

बल्क डिपॉजिट यानी बड़ी रकम का फिक्स्ड डिपॉजिट, जिसे आमतौर पर कंपनियां, सरकारी संस्थाएं, ट्रस्ट, कॉरपोरेट और बड़े निवेशक बैंक में जमा कराते हैं। अलग-अलग श्रेणी के बैंकों के लिए इसकी सीमा भी अलग-अलग तय की गई है।

Scheduled Commercial Banks और Small Finance Banks के लिए 3 करोड़ रुपए या उससे अधिक का डिपॉजिट बल्क डिपॉजिट माना जाता है। वहीं Regional Rural Banks (RRB) और Co-operative Banks के लिए 1 करोड़ रुपए या उससे अधिक की जमा राशि बल्क डिपॉजिट की श्रेणी में आती है।

HDFC Bank विवाद के बाद चर्चा में आया नियम

हाल ही में HDFC Bank बल्क डिपॉजिट को लेकर विवादों में आया था। बैंक ने महाराष्ट्र स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MSRDC) को बल्क डिपॉजिट पर 6.01 प्रतिशत ब्याज दर ऑफर की थी, जबकि सामान्य सेविंग्स डिपॉजिट पर करीब 3.5 प्रतिशत ब्याज दिया जा रहा था।

इसी मामले में ‘मार्केटिंग स्पेंड्स’ के तहत कथित तौर पर 45 करोड़ रुपए के भुगतान का भी विवाद सामने आया था। जांच के बाद HDFC Bank ने अपने कुछ वरिष्ठ अधिकारियों को चेतावनी पत्र जारी किए और उन पर एक-एक लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया।

नए नियम से बैंकों को क्या फायदा होगा?

इस बदलाव के बाद बैंक अपनी फंडिंग जरूरत के हिसाब से बल्क डिपॉजिट पर प्रतिस्पर्धी ब्याज दर दे सकेंगे। इससे उन्हें बड़ी कंपनियों, संस्थाओं और निवेशकों से ज्यादा जमा राशि आकर्षित करने में मदद मिलेगी। बैंकों की लिक्विडिटी मजबूत होगी और जरूरत के समय उन्हें फंड जुटाने में अधिक लचीलापन मिलेगा।

आम ग्राहकों पर क्या होगा असर?

यह नियम मुख्य रूप से बड़े निवेशकों और संस्थानों के लिए लागू किया गया है। सामान्य बचत खाता, छोटी एफडी (Fixed Deposit) या रिटेल ग्राहकों की ब्याज दरों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। हालांकि, बैंकों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ने से भविष्य में डिपॉजिट स्कीमों पर बेहतर ऑफर देखने को मिल सकते हैं।

एक नजर में पूरा अपडेट

RBI ने बल्क डिपॉजिट पर अलग ब्याज दर देने की अनुमति दी है। यह नियम घरेलू रुपये और NRI बल्क डिपॉजिट पर लागू होगा। सभी शाखाओं में एक समान ब्याज दर देना अनिवार्य रहेगा। रोज सुबह 10 बजे तक ब्याज दरों का प्रदर्शन करना होगा।

Scheduled Commercial Bank और Small Finance Bank में 3 करोड़ रुपए से अधिक तथा RRB और Co-operative Bank में 1 करोड़ रुपए से अधिक की जमा राशि बल्क डिपॉजिट मानी जाएगी। इस फैसले से बैंकों को बड़े डिपॉजिट जुटाने में आसानी होगी, जबकि आम ग्राहकों के मौजूदा एफडी और सेविंग्स अकाउंट के नियमों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है।