अमित पांडेय, डोंगरगढ़। डोंगरगढ़ भाजपा में संगठनात्मक असंतोष थमने का नाम नहीं ले रहा है। 111 कार्यकर्ताओं के सामूहिक इस्तीफे के बाद अब पूर्व भाजयुमो मंडल अध्यक्ष सुमित मिश्रा, पूर्व महिला मोर्चा अध्यक्ष एम. तुलसी, भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के जिला मंत्री बलविंदर सिंह भाटिया समेत 26 पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने भी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है।
लगातार सामने आ रहे इस्तीफों ने डोंगरगढ़ भाजपा में गहराते संगठनात्मक संकट को उजागर कर दिया है। जिलाध्यक्ष कोमल सिंह राजपूत को भेजे गए इस्तीफा पत्र में कार्यकर्ताओं ने शहर मंडल अध्यक्ष जसमीत सिंह बन्नोतआना पर परिवारवाद, गुटबाजी और निष्ठावान कार्यकर्ताओं की उपेक्षा करने के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि संगठन में फैसले कुछ चुनिंदा लोगों के प्रभाव में लिए जा रहे हैं, जिससे वर्षों से पार्टी के लिए काम कर रहे कार्यकर्ता खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।

गौरतलब है कि इससे पहले 111 कार्यकर्ताओं के सामूहिक इस्तीफे की खबर सामने आने के बाद भाजपा जिलाध्यक्ष कोमल सिंह राजपूत ने बयान दिया था कि उन्हें किसी भी प्रकार का इस्तीफा प्राप्त नहीं हुआ है। वहीं इस्तीफा देने वाले नेताओं का कहना है कि यह छत्तीसगढ़ में भाजपा के इतिहास का सबसे बड़ा सामूहिक इस्तीफा है। उनका सवाल है कि जब इस घटनाक्रम की जानकारी पूरे प्रदेश और देश तक पहुंच गई तो फिर जिला अध्यक्ष को इसकी जानकारी कैसे नहीं मिली।
भाजपा की बढ़ सकती है मुश्किलें
डोंगरगढ़ में भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं के इतनी बड़ी संख्या में हो रहे इस्तीफे ने संगठन की चिंता बढ़ा दी है। पहले 111 और अब 25 नेताओं के अलावा, पहले भाजपा के पार्षद और पूर्व नेता प्रतिपक्ष अमित छाबड़ा को निष्कासित किया गया था उसके बाद भाजपा के जमीनी कार्यकर्ता अनिल पांडेय ने भी पार्टी से दूरी बना ली है। लगातार हो रहे इन घटनाक्रमों से माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में भाजपा की मुश्किलें बढ़ सकती है।
सुमित मिश्रा ने की इस्तीफा वापस लेने की घोषणा
इस्तीफे की सूची सामने आते ही घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया। सूची में शामिल पूर्व भाजयुमो मंडल अध्यक्ष सुमित मिश्रा ने कुछ ही देर बाद पलटी मारते हुए लिखित बयान जारी कर इस्तीफा वापस लेने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि वह भाजपा के सच्चे और निष्ठावान कार्यकर्ता हैं तथा बिना किसी शर्त के सामूहिक इस्तीफे की सूची से अपना नाम वापस ले रहे हैं। हालांकि, उनके इस अचानक बदले रुख को लेकर संगठन और राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।

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