दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) के आवास पोर्टल में तकनीकी गड़बड़ी के कारण एक महिला डॉक्टर को अपने आवंटित फ्लैट से हाथ धोना पड़ा और जमा की गई राशि वापस पाने के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी। अब उपभोक्ता आयोग ने उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए DDA को जमा धनराशि लौटाने का निर्देश दिया है। महिला डॉक्टर ने DDA की आवास योजना के तहत एक फ्लैट के लिए आवेदन किया था और निर्धारित राशि भी जमा कर दी थी। लेकिन पोर्टल में आई तकनीकी खामी के चलते भुगतान और आवंटन से जुड़ी प्रक्रिया में समस्या उत्पन्न हो गई। इसके परिणामस्वरूप वह फ्लैट अपने नाम पर सुरक्षित नहीं रख सकीं और आवंटन रद्द हो गया।

DDA) के आवास पोर्टल में आई तकनीकी खामी से प्रभावित महिला डॉक्टर को बड़ी राहत देते हुए दक्षिण (II) जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया है। आयोग ने स्पष्ट कहा कि किसी सरकारी पोर्टल या ऑनलाइन प्रणाली की तकनीकी खराबी का खामियाजा उपभोक्ता को नहीं भुगतना चाहिए। आयोग की अध्यक्ष मोनिका अग्रवाल श्रीवास्तव और सदस्य डॉ. राजेंद्र धर की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए DDA को फटकार लगाई और पीड़िता को राहत देने का आदेश दिया। मामले के अनुसार, दक्षिण दिल्ली के अलकनंदा क्षेत्र की निवासी डॉ. आकांक्षा मौर्या ने DDA के तहत एक फ्लैट के लिए आवेदन किया था। आवेदन प्रक्रिया के दौरान उन्होंने बुकिंग राशि के रूप में दो लाख रुपये जमा किए थे। हालांकि, आवास पोर्टल में तकनीकी गड़बड़ी के कारण उन्हें आवंटित फ्लैट से वंचित होना पड़ा और बाद में अपनी जमा राशि वापस पाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी।

फ्लैट सरेंडर कर मांगी जमा राशि वापस

मामले के अनुसार, अलकनंदा निवासी डॉ. आकांक्षा मौर्या ने DDA की हाउसिंग स्कीम 2021 के तहत आवेदन किया था और बुकिंग राशि के रूप में दो लाख रुपये जमा किए थे। 10 मार्च 2021 को आयोजित ड्रॉ में उन्हें द्वारका सेक्टर-19बी स्थित पांचवीं मंजिल का एमआईजी फ्लैट नंबर 169 आवंटित हुआ। हालांकि, आवंटन के बाद पूरी प्रक्रिया तकनीकी खामी के कारण अटक गई। नियमों के अनुसार फ्लैट आवंटित होने के बाद डिमांड लेटर पोर्टल पर उपलब्ध होना चाहिए था, ताकि आवेदक निर्धारित समय के भीतर आगे का भुगतान कर सके। लेकिन डॉ. आकांक्षा के पोर्टल पर डिमांड लेटर देखने का विकल्प ही दिखाई नहीं दिया।

उन्होंने समस्या के समाधान के लिए कई बार DDA की हेल्पलाइन और अधिकारियों से संपर्क किया, लेकिन हर बार उन्हें इंतजार करने की सलाह दी गई। महीनों तक समस्या का समाधान नहीं हुआ। आखिरकार 8 जुलाई 2021 को DDA ने ई-मेल के जरिए उन्हें सूचित किया कि तकनीकी खामी दूर कर दी गई है और अब डिमांड लेटर देखा जा सकता है। लेकिन तब तक लगातार इंतजार, अनिश्चितता और मानसिक तनाव से परेशान डॉ. आकांक्षा का भरोसा प्रक्रिया से उठ चुका था। उन्होंने उसी दिन फ्लैट सरेंडर करने का निर्णय लिया और अपनी जमा की गई राशि वापस मांग ली।

फ्लैट सरेंडर करने के बाद डॉ. आकांक्षा मौर्या ने अपनी जमा राशि वापस मांगी, लेकिन DDA ने रिफंड देने से इनकार कर दिया। DDA का तर्क था कि शिकायतकर्ता ने निर्धारित 90 दिनों की अवधि के भीतर फ्लैट रद्द नहीं कराया, इसलिए रिफंड पर कटौती के नियम लागू होंगे। DDA ने यह भी दावा किया कि डिमांड लेटर मार्च 2021 में ही जारी कर दिया गया था और आवेदक को समय पर भुगतान करना चाहिए था। हालांकि, डॉ. आकांक्षा ने कहा कि पोर्टल की तकनीकी समस्या के कारण उन्हें डिमांड लेटर दिखाई ही नहीं दिया और इसी वजह से वह आगे की प्रक्रिया पूरी नहीं कर सकीं। विवाद बढ़ने पर मामला उपभोक्ता आयोग पहुंचा। सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि DDA अपने दावों के समर्थन में कोई ठोस और विश्वसनीय प्रमाण पेश नहीं कर सका। आयोग के सामने यह भी स्पष्ट हुआ कि शिकायतकर्ता लगातार तकनीकी समस्या की शिकायत करती रही थीं और समाधान के लिए DDA से संपर्क में थीं।

6 फीसदी ब्याज के साथ लौटाएं राशि

आयोग ने DDA को उनकी जमा की गई दो लाख रुपये की बुकिंग राशि वापस करने का निर्देश दिया है। आयोग ने आदेश दिया कि यह राशि छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटाई जाए। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि DDA आदेश जारी होने के दो महीने के भीतर भुगतान नहीं करता है, तो बकाया राशि पर ब्याज दर बढ़ाकर सात प्रतिशत वार्षिक कर दी जाएगी। इसके अलावा, शिकायतकर्ता को हुई परेशानी और मानसिक तनाव को देखते हुए आयोग ने DDA को 25 हजार रुपये मानसिक प्रताड़ना के मुआवजे के रूप में तथा पांच हजार रुपये मुकदमे के खर्च के रूप में भुगतान करने का भी आदेश दिया।

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