नई दिल्ली। कपिल मिश्रा (Kapil Mishra) को 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में बड़ी राहत मिली है। राउज एवेन्यू कोर्ट ने बुधवार को उनके और अन्य आरोपियों के खिलाफ दायर शिकायत को खारिज कर दिया। अदालत ने यह फैसला शिकायतकर्ता के लगातार पेश न होने और मामले को आगे न बढ़ाने के कारण लिया। यह शिकायत मोहम्मद इलियास नामक व्यक्ति ने 2020 में हुए उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के संबंध में दर्ज कराई थी। कोर्ट के इस निर्णय के बाद फिलहाल इस मामले में कपिल मिश्रा को राहत मिल गई है। हालांकि, अन्य मामलों या जांच से जुड़ी प्रक्रिया अलग से जारी रह सकती है।

अदालत ने शिकायतकर्ता की अनुपस्थिति और मामले को आगे न बढ़ाने को प्रमुख आधार माना। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने शिकायतकर्ता के वकील द्वारा दिए गए विरोधाभासी बयानों पर कड़ी नाराजगी भी जाहिर की। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अश्विनी पंवार ने अपने आदेश में कहा कि शिकायतकर्ता न केवल बुधवार को अदालत में मौजूद नहीं था, बल्कि पिछली कई तारीखों पर भी पेश नहीं हुआ। ऐसे में अदालत के पास शिकायत को खारिज करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा।

शिकायतकर्ता जानबूझकर कार्यवाही में देरी कर रहा

यह आदेश अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अश्विनी पंवार ने 29 अप्रैल को दिया। कोर्ट ने अपने आदेश में सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि बिना किसी ठोस वजह के शिकायतकर्ता की लगातार गैरमौजूदगी यह दर्शाती है कि वह जानबूझकर कार्यवाही में देरी कर रहा है। अदालत ने कहा कि ऐसी स्थिति में शिकायतकर्ता द्वारा केस आगे न बढ़ाने के कारण कोर्ट के पास इसे खारिज करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। अदालत ने स्पष्ट किया कि शिकायतकर्ता मोहम्मद इलियास न केवल सुनवाई के दिन अनुपस्थित रहा, बल्कि पिछली कई तारीखों पर भी पेश नहीं हुआ।

FIR दर्ज करने की अर्जी खारिज

इससे पहले कोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने की अर्जी भी खारिज कर दी थी और शिकायतकर्ता से अपना बयान दर्ज कराने को कहा था। अदालत को यह भी बताया गया था कि 13 मार्च 2026 के आदेश के खिलाफ एक पुनरीक्षण याचिका दायर की गई थी। इसके बाद मामले को 27 मार्च को शिकायतकर्ता की जांच (एग्जामिनेशन) के लिए सूचीबद्ध किया गया था, लेकिन सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता की लगातार गैरमौजूदगी बनी रही। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने अपने आदेश में कहा कि शिकायतकर्ता द्वारा केस को आगे न बढ़ाने और बार-बार अनुपस्थित रहने के कारण अदालत को शिकायत खारिज करनी पड़ी।

अदालत ने पाया कि 27 मार्च 2026 को शिकायतकर्ता अपनी जांच (एग्जामिनेशन) के लिए पेश नहीं हुआ। उसके वकील के अनुरोध पर मामले को 8 अप्रैल सुबह 11:30 बजे तक स्थगित किया गया, लेकिन उस दिन भी शिकायतकर्ता अनुपस्थित रहा। इसके बाद वकील ने अदालत को बताया कि 13 मार्च 2026 के आदेश के खिलाफ सत्र न्यायाधीश, राउज एवेन्यू कोर्ट के समक्ष पुनरीक्षण याचिका दायर की गई है। इस आधार पर अदालत ने सुनवाई को आगे बढ़ाते हुए मामले को 17 अप्रैल 2026 के लिए स्थगित कर दिया।

 29 अप्रैल को अंतिम मौका मिला था

कोर्ट रिकॉर्ड के अनुसार, 17 अप्रैल 2026 को शिकायतकर्ता पक्ष ने अपने वकील महमूद प्राचा की अनुपस्थिति का हवाला देते हुए सुनवाई स्थगित करने की मांग की। इस दिन भी शिकायतकर्ता स्वयं अदालत में मौजूद नहीं था। इसके बाद अदालत ने मामले को 29 अप्रैल 2026 के लिए स्थगित करते हुए स्पष्ट कर दिया कि यह अंतिम अवसर होगा। 29 अप्रैल को फिर से यह निवेदन किया गया कि सत्र न्यायालय के समक्ष जल्द पुनरीक्षण याचिका दायर की जाएगी। इस पर अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि यह दलील पहले दिए गए बयानों के विपरीत है, जिन्हें 8 अप्रैल के आदेश में दर्ज किया जा चुका है। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने इन परिस्थितियों को गंभीरता से लेते हुए पाया कि शिकायतकर्ता लगातार कार्यवाही में सहयोग नहीं कर रहा।

पिछली तीन तारीखों पर नहीं आया शिकायतकर्ता

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि शिकायतकर्ता के वकील द्वारा दिए गए विरोधाभासी बयान यह दर्शाते हैं कि मामले की कार्यवाही को लेकर उनका रवैया लापरवाह रहा है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसी स्थिति न्यायिक प्रक्रिया के प्रति गंभीरता की कमी को दिखाती है। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने यह भी कहा कि पिछली तीन लगातार सुनवाई तारीखों पर शिकायतकर्ता की गैरमौजूदगी इस बात का संकेत है कि वह मामले को आगे बढ़ाने में रुचि नहीं रखता। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि विशेष रूप से पूछे जाने के बावजूद शिकायतकर्ता के पेश न होने का कोई ठोस कारण वकीलों द्वारा नहीं बताया गया। केवल यह कहा गया कि वे जल्द ही पुनरीक्षण (रिविजन) याचिका दायर करेंगे।

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