केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) के रिटायर जवान और कर्मचारी अपनी विभिन्न मांगों को लेकर 7 नवंबर से दिल्ली के जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल शुरू करने जा रहे हैं। यह विरोध प्रदर्शन ऑल एक्स-पैरामिलिट्री फोर्सेस वेलफेयर एसोसिएशन के बैनर तले आयोजित किया जाएगा। प्रदर्शनकारी CRPF, CISF समेत केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों से जुड़े हाल में लागू किए गए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) अधिनियम, 2026 का विरोध कर रहे हैं। यह अधिनियम 9 अप्रैल 2026 को लागू हुआ था।
पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग
रिटायर जवानों की प्रमुख मांगों में पुरानी पेंशन योजना (OPS) को फिर से लागू करना शामिल है। उनका कहना है कि केंद्रीय बलों के जवानों और कर्मचारियों को पुरानी पेंशन व्यवस्था का लाभ मिलना चाहिए। इसके अलावा प्रदर्शनकारी केंद्रीय बलों में डेपुटेशन पर आने वाले IPS अधिकारियों के बढ़ते वर्चस्व का भी विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि CAPF के प्रशासन और संचालन में बलों के अपने अधिकारियों को पर्याप्त भूमिका मिलनी चाहिए।
सरकार पर मांगों की अनदेखी का आरोप
ऑल एक्स-पैरामिलिट्री फोर्सेस वेलफेयर एसोसिएशन के सचिव रणबीर सिंह ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार उनकी मांगों को लंबे समय से नजरअंदाज कर रही है। उन्होंने कहा कि ऐसे में संगठन के पास विरोध प्रदर्शन के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।रणबीर सिंह ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) अधिनियम, 2026 को ‘काला कानून’ बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि संगठन इस कानून को रद्द कराने और पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाल करने की मांग को लेकर 7 नवंबर से जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल करेगा।
उन्होंने बताया कि इस संबंध में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर कानून को रद्द करने की मांग की गई थी, लेकिन सरकार की ओर से कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला। रणबीर सिंह ने कहा कि केंद्रीय बलों में लंबे समय से सेवा दे रहे जवानों और अधिकारियों के अनुभव और विशेषज्ञता की जगह अगर डेपुटेशन पर आने वाले नौकरशाहों को प्राथमिकता दी जाएगी, तो बल के कर्मचारियों के लिए स्वाभिमान के साथ सेवा करना मुश्किल हो जाएगा।
क्या है केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल अधिनियम 2026?
केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) अधिनियम, 2026 को 9 अप्रैल 2026 से लागू किया गया था। इस कानून के तहत CRPF, CISF समेत केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में वरिष्ठ पदों पर डेपुटेशन पर आने वाले IPS अधिकारियों की नियुक्ति को कानूनी आधार दिया गया है। नए अधिनियम के तहत CAPF में कुल IG पदों में से 50 फीसदी पद IPS अधिकारियों के लिए आरक्षित रहेंगे। इसके अलावा कम से कम 67 फीसदी ADG पद डेपुटेशन पर आने वाले IPS अधिकारियों के जरिए भरे जाएंगे। वहीं, CAPF के सभी स्पेशल DG और DG पद IPS कैडर के लिए आरक्षित किए गए हैं। इससे केंद्रीय बलों के वरिष्ठ नेतृत्व पदों पर IPS अधिकारियों की भूमिका बढ़ने का रास्ता साफ हुआ है।
DIG पदों पर 50% की सीमा हटाई
अधिनियम में ग्रुप-A CAPF अधिकारियों के लिए DIG पदों पर पहले लागू 50 फीसदी की सीमा को हटा दिया गया है। इससे IPS अधिकारियों की नियुक्ति की गुंजाइश और बढ़ सकती है। इससे पहले वरिष्ठ पदों पर IPS अधिकारियों की ऐसी नियुक्तियां मुख्य रूप से कार्यकारी आदेशों के जरिए की जाती थीं। नए कानून के बाद इन नियुक्तियों को वैधानिक आधार मिल गया है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना का आरोप
ऑल एक्स-पैरामिलिट्री फोर्सेस वेलफेयर एसोसिएशन ने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) अधिनियम, 2026 को सुप्रीम कोर्ट के पिछले आदेश को बेअसर करने के लिए लागू किया है। एसोसिएशन के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल गृह मंत्रालय को निर्देश दिया था कि BSF, CRPF, CISF, ITBP और SSB में IG स्तर तक डेपुटेशन पर तैनात IPS अधिकारियों की संख्या को दो साल के भीतर चरणबद्ध तरीके से कम किया जाए। साथ ही अदालत ने छह महीने के भीतर CAPF की कैडर समीक्षा पूरी करने का निर्देश दिया था।
सरकार पर आदेश लागू नहीं करने का आरोप
एसोसिएशन के सचिव रणबीर सिंह का आरोप है कि गृह मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को लागू करने के बजाय नया कानून लागू कर दिया। उनका कहना है कि इस कानून के जरिए केंद्रीय बलों में IPS अधिकारियों का वर्चस्व बनाए रखने की कोशिश की गई है। रणबीर सिंह के मुताबिक, इससे CAPF के अपने कैडर अधिकारियों के लिए वरिष्ठ पदों पर पदोन्नति के अवसर प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि इसी के विरोध में सेवानिवृत्त जवान और अधिकारी अब आंदोलन तेज करने की तैयारी में हैं।
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