दिल्ली के नए शहरी क्षेत्रों को सुनियोजित तरीके से विकसित करने के लिए मास्टर प्लान-2047 (Delhi Master Plan 2047) में लैंड पूलिंग व्यवस्था को और मजबूत किया गया है। इसके तहत शहरी विस्तार क्षेत्र में करीब 200 वर्ग किलोमीटर जमीन को योजनाबद्ध तरीके से विकसित किया जाएगा। लैंड पूलिंग वाले क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए करीब 600 किलोमीटर का नया सड़क नेटवर्क विकसित किया जाएगा। योजना के तहत 30 मीटर या उससे अधिक चौड़ी सड़कों का विकास डीडीए खुद करेगा।
20 हेक्टेयर की टाउन प्लानिंग स्कीम
मास्टर प्लान-2047 में जमीन मालिकों को अपने भूखंडों के विकास के लिए कई विकल्प दिए गए हैं। इसके तहत जमीन मालिक स्वेच्छा से अपनी जमीन को पूल कर सकते हैं और कंसोर्टियम बनाकर संयुक्त रूप से विकास कार्य कर सकते हैं। इसके अलावा टाउन प्लानिंग स्कीम (TPS) का विकल्प भी उपलब्ध कराया गया है। एक टाउन प्लानिंग स्कीम के लिए कम से कम 20 हेक्टेयर क्षेत्र जरूरी होगा। इसका उद्देश्य बड़े क्षेत्र को एक साथ योजनाबद्ध तरीके से विकसित करना है।
सेक्टर 8बी सबसे आगे
प्लानिंग जोन पी-II के गांव गढ़ी खसरो और इब्राहिमपुर में आने वाला सेक्टर 8बी 70 फीसदी लगातार पूल जमीन की अनिवार्य सीमा हासिल करने वाला पहला सेक्टर बन गया है। डीडीए के अनुसार, लैंड पूलिंग नीति को जमीन पर तेजी से लागू करने के लिए दिल्ली विकास अधिनियम, 1957 में जरूरी संशोधन भी किए जाएंगे। डीडीए का कहना है कि इस व्यवस्था से नए शहरी क्षेत्रों में आवास, रोजगार, स्कूल, अस्पताल और पार्क जैसी सुविधाओं का एक साथ विकास करने का रास्ता साफ होगा। इससे अलग-अलग भूखंडों पर बिखरे विकास के बजाय समग्र और सुनियोजित शहरी विकास को बढ़ावा मिलेगा।
105 गांव, 138 सेक्टर
दिल्ली में लैंड पूलिंग क्षेत्र छह प्लानिंग जोन- के-I, एल, पी, एन, पी-II और पी-I के हिस्से में फैला हुआ है। इस क्षेत्र में कुल 105 राजस्व गांव और 138 सेक्टर शामिल हैं। जुलाई 2026 तक डीडीए को लैंड पूलिंग के लिए 7,615 से अधिक आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। वहीं, 7,885 हेक्टेयर से अधिक जमीन रजिस्टर्ड या पूल की जा चुकी है। डीडीए के मुताबिक, अब तक 16 सेक्टरों में 70 फीसदी लगातार पूल की गई जमीन की अनिवार्य सीमा पूरी हो चुकी है। यह लैंड पूलिंग नीति के तहत नए शहरी क्षेत्रों के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति मानी जा रही है।
सड़क की चौड़ाई के हिसाब से होगा इस्तेमाल
मास्टर प्लान-2047 में इन्क्लूसिव जोनिंग का प्रावधान किया गया है। इसके तहत आवासीय प्लॉट में सड़क की चौड़ाई के आधार पर अलग-अलग तरह की गतिविधियों की अनुमति दी जाएगी। इस व्यवस्था से आवासीय इलाकों में जरूरत के अनुसार छोटे प्रतिष्ठान और जरूरी सेवाएं विकसित की जा सकेंगी। इससे स्थानीय स्तर पर लोगों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध होने के साथ नए शहरी क्षेत्रों में मिश्रित और सुविधाजनक विकास को बढ़ावा मिलेगा।
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