आशुतोष द्विवेदी, रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा जिले से सरकारी स्कूलों के गरीब बच्चों को बांटी जाने वाली मुफ्त किताबों में बड़ा घोटाला सामने आया है। पाठ्य पुस्तक निगम के रीवा स्थित मुख्य गोदाम से 450 से ज्यादा बंडल किताबें रहस्यमयी ढंग से गायब हो गई हैं। जानकारी के मुताबिक लापता किताबों की बाजार में कीमत करीब 35 लाख रुपये आंकी जा रही है। इस खुलासे के बाद रीवा से लेकर भोपाल तक के गलियारों में हड़कंप मच गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए भोपाल से उच्च स्तरीय अधिकारियों की एक स्पेशल टीम जांच के लिए रीवा पहुंच चुकी है।
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चोरहटा थाने में FIR दर्ज
इस पूरे सिंडिकेट और फर्जीवाड़े की परतें तब खुलीं जब डिपो में किताबों का स्टॉक मैच नहीं हुआ। गोदाम से इतनी बड़ी मात्रा में सरकारी संपत्ति के गायब होने और अन्य प्रशासनिक अनियमितताओं को देखते हुए संबंधित विभाग ने चोरहटा पुलिस थाने में आधिकारिक FIR दर्ज करा दी है।
गोदाम की सुरक्षा व्यवस्था के बीच से 450 से अधिक बंडलों का गायब होना किसी एक व्यक्ति का काम नहीं हो सकता। पुलिस अब गोदाम के रिकॉर्ड, पूर्व के स्टॉक और ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों की भूमिका की बारीकी से जांच कर रही है।
भोपाल से पहुंची टीम, खुलेगा कई ‘सफेदपोशों’ का राज!
भोपाल से रीवा पहुंची स्पेशल टीम ने डिपो में डेरा डाल दिया है। जांच के दौरान केवल किताबों की कमी ही नहीं, बल्कि कई अन्य वित्तीय और प्रशासनिक गड़बड़ियां भी सामने आई हैं। अधिकारियों का मानना है कि जांच का दायरा जैसे-जैसे बढ़ेगा, विभाग के कई बड़े चेहरों और सप्लायर्स पर गाज गिरना तय है।
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इस बड़े फर्जीवाड़े के सामने आने के बाद अब पुलिस और भोपाल की जांच टीम की संयुक्त रिपोर्ट पर सबकी नजरें टिकी हैं। सवाल यही है कि गरीब बच्चों के हक पर डाका डालने वाले इस ‘किताब चोर सिंडिकेट’ का असली मास्टरमाइंड कौन है?
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