एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन सुभाष चंद्रा के हालिया बयानों को लेकर कॉरपोरेट जगत में हलचल के बीच रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) ने शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 को आधिकारिक मीडिया बयान जारी कर उनके आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। रिलायंस ने चंद्रा की टिप्पणियों को “पूरी तरह निराधार” बताते हुए अपने मीडिया ब्रांड्स के इस्तेमाल को लेकर लगाए गए आरोपों का कड़ा खंडन किया।

‘मीडिया का इस्तेमाल किसी को निशाना बनाने के लिए नहीं’

RIL के कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस, मुंबई की ओर से जारी बयान में कहा गया कि रिलायंस ग्रुप का हिस्सा बनी मीडिया संस्थाओं का इस्तेमाल कभी भी किसी व्यक्ति या संस्था को निशाना बनाने के लिए नहीं किया गया और न ही भविष्य में ऐसा किया जाएगा।

हालांकि, कड़े खंडन के बावजूद रिलायंस ने सुभाष चंद्रा के प्रति व्यक्तिगत सम्मान भी व्यक्त किया। कंपनी ने उन्हें एक उद्योगपति और उद्यमी के रूप में सम्मानित बताते हुए उनके बेहतर भविष्य की कामना की। इस रुख को कारोबारी विवाद को और तूल न देने वाली संतुलित प्रतिक्रिया के तौर पर देखा जा रहा है।

₹22,006 करोड़ के दावों से शुरू हुआ विवाद

विवाद की पृष्ठभूमि सुभाष चंद्रा की व्यक्तिगत दिवालियापन कार्यवाही में NCLT द्वारा मंजूर किए गए सेटलमेंट प्लान से जुड़ी है। प्लान के तहत चंद्रा को उनके खिलाफ स्वीकार किए गए ₹22,006 करोड़ के दावों के मुकाबले अपनी व्यक्तिगत संपत्ति से ₹6.25 करोड़ का योगदान करना है।

इसे लेकर 99.97% के ‘हेयरकट’ की चर्चा हुई। हालांकि, सरकारी सूत्रों के अनुसार यह व्याख्या भ्रामक है। ₹22,006 करोड़ का आंकड़ा मुख्य रूप से चंद्रा के पर्सनल गारंटर के तौर पर बने दावों को दर्शाता है, न कि उनके द्वारा व्यक्तिगत रूप से लिए गए कर्ज को।

NCLT ने क्यों मंजूर किया प्लान?

मामला उस व्यक्तिगत गारंटी से जुड़ा है जो चंद्रा ने विवेक इन्फ्राकॉन द्वारा इंडियाबुल्स से लिए गए कर्ज के लिए दी थी। डिफॉल्ट के बाद उनके खिलाफ व्यक्तिगत दिवालियापन की कार्यवाही शुरू हुई।

NCLT की दिल्ली बेंच ने बाद में IBC की धारा 114 के तहत सेटलमेंट को मंजूरी दी। ट्रिब्यूनल ने रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल के आकलन को ध्यान में रखते हुए माना कि चंद्रा की व्यक्तिगत संपत्ति दावों की तुलना में काफी कम है और उन्हें जबरन दिवालिया घोषित करने पर लेनदारों को और कम रकम मिल सकती है।

प्लान के तहत चंद्रा ₹6.25 करोड़ देंगे, जबकि कॉरपोरेट बॉरोअर्स से करीब ₹1,494 करोड़ मिलने की उम्मीद है। वोटिंग शेयर का 80.81% प्रतिनिधित्व करने वाले क्रेडिटर्स ने रिजॉल्यूशन प्लान के पक्ष में मतदान किया था।

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