मुकेश मौर्य, धरमजयगढ़। रायगढ़ जिले के विकासखंडों में से धरमजयगढ़ ऐसा क्षेत्र है, जहां बच्चों में कुपोषण की समस्या लगातार चिंता का विषय बनी हुई है। इस वजह से सिविल अस्पताल धरमजयगढ़ में बच्चों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। पहाड़ी और जंगलों में बसे कई गांवों तक स्वास्थ्य सुविधाओं और नियमित स्वास्थ्य शिविरों की पहुंच सीमित है। ऐसे में ग्रामीण अक्सर तब अस्पताल पहुंचते हैं, जब उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ जाती है।

लापरवाही पड़ रही भारी
इन इलाकों में महिलाओं की स्थिति भी कुपोषण से सीधे जुड़ी हुई है। शिक्षा के अभाव और स्वास्थ्य संबंधित जानकारी ना मिल पाने के कारण महिलाएं गर्भावस्था के दौरान लापरवाही बरत रही है, जिस कारण कुपोषण का शिकार उनके बच्चे हो रहें है। उनके उपचार को लेकर खंड चिकित्सा अधिकारी गजानंद राठिया ने सख्त निर्देश दिए है।

नवजात हो रहे कुपोषण का शिकार
बता दें की दिनभर घरेलू और दूसरे दैनिक कार्यों में व्यस्त रहने के कारण कई महिलाएं नियमित रूप से पौष्टिक आहार नहीं ले पातीं। डॉक्टरों के मुताबिक, जंगलों में रहने वाले परिवारों की महिलाओं में पोषण की कमी का असर बच्चों के स्वास्थ्य पर भी पड़ता है और नवजात कुपोषण का शिकार हो रहे हैं। शासन की योजना के तहत कुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) में भर्ती कर उपचार और पोषण दिया जाता है।

240 बच्चों को सुपोषित करने का लक्ष्य
धरमजयगढ़ के NRC केंद्र में इस वर्ष 240 कुपोषित बच्चों को सुपोषित करने का लक्ष्य मिला है। वर्ष 2004 से संचालित इस व्यवस्था में बच्चों के साथ उनकी माताओं को भी केंद्र में रखा जाता है। यहां दूर दराज से महिलाएं अपने बच्चों को लाकर उनका ईलाज करवा रही है और बेहतर उपचार व खंड चिकित्सा अधिकारी गजानंद राठिया के निर्देश के कारण डॉ भगत की निगरानी में कुपोषित बच्चों में बेहतर सुधार देखने को मिल रहा है। साथ ही बच्चें स्वास्थ होकर अपने घर जा रहें है।

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