कुंदन कुमार, पटना। राजद सांसद सुधाकर सिंह ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) में डॉ. सच्चिदानंद जोशी की नियुक्ति और उन्हें पद पर बनाए रखने की स्वतंत्र जांच को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। उन्होंने दावा किया है कि डॉ. जोशी से जुड़े पुराने छत्तीसगढ़ लोक आयोग (लोकायुक्त) के रिकॉर्ड और IGNCA के कार्यकाल से संबंधित ऑडिट आपत्तियों के बावजूद उन्हें महत्वपूर्ण पद पर बनाए रखा गया। सुधाकर सिंह ने पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने और जांच पूरी होने तक डॉ. जोशी को तत्काल पद से हटाने की मांग की है।

सुधाकर सिंह ने अपने पत्र में कहा है कि वह करीब एक महीने पहले भी प्रधानमंत्री को डॉ. जोशी से संबंधित शिकायत और उपलब्ध दस्तावेजों के बारे में पत्र लिख चुके हैं। उनके मुताबिक, अब तक इस मामले में कोई प्रभावी, स्वतंत्र और समयबद्ध कार्रवाई नहीं हुई है।

लोकायुक्त की कार्रवाई की सिफारिश का हवाला

सांसद ने अपने पत्र में छत्तीसगढ़ के कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर में डॉ. सच्चिदानंद जोशी के तत्कालीन कुलपति कार्यकाल का जिक्र किया है। उन्होंने दावा किया है कि विश्वविद्यालय में नियुक्तियों से जुड़ी प्रक्रिया को लेकर छत्तीसगढ़ लोक आयोग के रिकॉर्ड में पात्रता, चयन मानदंड और अंकों के निर्धारण समेत कई सवाल उठाए गए थे।

सुधाकर सिंह ने पत्र में कहा है कि उपलब्ध लोक आयोग के रिकॉर्ड में प्रथम दृष्टया तथ्य प्रमाणित पाए जाने के आधार पर छत्तीसगढ़ लोक आयोग अधिनियम, 2002 की धारा 11(1) के तहत कार्रवाई की अनुशंसा का उल्लेख है। उन्होंने सवाल उठाया कि केंद्र सरकार के महत्वपूर्ण पद पर नियुक्ति से पहले इन रिकॉर्ड का सत्यापन किस स्तर पर किया गया।

IGNCA की ऑडिट रिपोर्ट का भी किया जिक्र

सुधाकर सिंह ने IGNCA से संबंधित महानिदेशक लेखा परीक्षा (केंद्रीय व्यय) की Inspection Report का भी हवाला दिया है। उनके मुताबिक, यह रिपोर्ट वर्ष 2016-17 से 2021-22 की अवधि से संबंधित है और इसमें नियुक्तियों तथा वित्तीय एवं प्रशासनिक प्रबंधन को लेकर कई आपत्तियां दर्ज हैं।

पत्र में उन्होंने दावा किया है कि कुछ प्रोफेसर पदों की नियुक्तियों में पात्रता और अनुभव से जुड़े रिकॉर्ड, शॉर्टलिस्टिंग प्रक्रिया तथा पात्रता में छूट से संबंधित दस्तावेजों को लेकर ऑडिट में सवाल उठाए गए। उन्होंने इन मामलों में जवाबदेही तय करने की मांग की है।

सुधाकर सिंह ने ऑडिट में करीब 6.5 करोड़ रुपये की राशि को मंत्रालय को वापस किए जाने की जरूरत और करीब 10.67 करोड़ रुपये की राशि लंबे समय तक IGNCA के पास रहने से संबंधित आपत्तियों का भी उल्लेख किया है। इसके अलावा छह क्षेत्रीय केंद्रों की स्थापना और संविदा कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए मंत्रालयों की जरूरी स्वीकृतियों के रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने का भी पत्र में जिक्र किया गया है।

वाराणसी केंद्र की नियुक्तियों और गांधी विद्या संस्थान का मामला

सांसद ने वाराणसी स्थित गांधी विद्या संस्थान से जुड़े IGNCA के कामकाज और करीब 60 लाख रुपये के कथित खर्च की स्वतंत्र वित्तीय जांच की मांग की है। उन्होंने इसके लिए प्रशासनिक स्वीकृति, वित्तीय मंजूरी, टेंडर, वर्क ऑर्डर, बिल और भुगतान से जुड़े दस्तावेजों की जांच कराने की मांग की है।

उन्होंने IGNCA के वाराणसी केंद्र में वर्ष 2024-25 के दौरान हुई पांच पदों की नियुक्तियों की भी जांच की मांग की है। इसमें आरक्षण रोस्टर, अभ्यर्थियों की पात्रता, स्क्रीनिंग, अंक, साक्षात्कार और चयन प्रक्रिया की पदवार एवं अभ्यर्थीवार जांच कराने की बात कही गई है।

पिछले 10 साल के फैसलों की जांच की मांग

सुधाकर सिंह ने IGNCA के वाराणसी, जम्मू/श्रीनगर, रांची, वडोदरा, गोवा, तिरुवनंतपुरम और पुडुचेरी स्थित क्षेत्रीय केंद्रों की भी स्वतंत्र जांच की मांग की है। उन्होंने केंद्रों की स्थापना, बजट, निर्माण, खरीद, नियुक्तियों, पदोन्नति, प्रतिनियुक्ति, आरक्षण रोस्टर और वित्तीय फैसलों की जांच कराने को कहा है।

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