कुंदन कुमार/​पटना। बिहार की राजनीति में इन दिनों सुरक्षा और सरकारी आवास का मुद्दा गरमाया हुआ है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की कद्दावर नेता और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने अपने आवास पर तैनात सरकारी सुरक्षा कर्मियों को वापस कर दिया है। इस कदम के बाद राजद ने राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

​सरकार का रवैया अपमानजनक: शक्ति सिंह यादव

​राजद के मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने इस मुद्दे पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से राज्य सरकार सुरक्षा और सरकारी आवास के नाम पर लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी को अपमानित करने की कोशिश कर रही है, वह न केवल निंदनीय है, बल्कि बेहद दुर्भाग्यपूर्ण भी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपनी शक्तियों का दुरुपयोग कर रही है ताकि राजद के शीर्ष नेतृत्व को मानसिक रूप से परेशान किया जा सके।

​राजद का बड़ा फैसला: सुरक्षा वापस करेंगे सभी विधायक

​शक्ति सिंह यादव ने दावा किया है कि यह केवल राबड़ी देवी का व्यक्तिगत निर्णय नहीं है, बल्कि यह पूरी पार्टी का सामूहिक रुख बनने वाला है। उन्होंने घोषणा की कि राजद के सभी विधायक और विधान पार्षद (MLC) आने वाले समय में एक-एक कर सरकार द्वारा प्रदत्त अपनी सुरक्षा वापस कर देंगे। यह एक प्रतीकात्मक विरोध है, जिसके जरिए राजद यह जताना चाहती है कि उन्हें सरकार की सुरक्षा की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि वे जनता के बीच सुरक्षित हैं।

​जनता का साथ ही हमारी सुरक्षा

​प्रवक्ता ने आत्मविश्वास के साथ कहा कि राजद को सरकारी सुरक्षा की जरूरत नहीं है, क्योंकि उनके साथ राज्य की आम जनता खड़ी है। उन्होंने याद दिलाया कि पिछले विधानसभा चुनाव में भी बिहार के 1 करोड़ 90 लाख लोगों ने राजद की नीतियों और नेतृत्व पर अपना भरोसा जताया था। लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव को जनता का भरपूर आशीर्वाद प्राप्त है।
​शक्ति सिंह ने अंत में कहा कि राबड़ी देवी का यह निर्णय स्वाभिमान का प्रतीक है। राजद नेता ने स्पष्ट कर दिया है कि वे सरकार के इस ‘दबाव वाली राजनीति’ के आगे झुकने वाले नहीं हैं। सुरक्षा वापस लेने का यह फैसला आने वाले दिनों में बिहार की सियासत में और अधिक हलचल पैदा कर सकता है। अब देखना होगा कि सरकार इस पर क्या प्रतिक्रिया देती है और क्या अन्य विपक्षी दल भी इस राह पर चलते हैं।