कुंदन कुमार, पटना। बिहार सरकार में पथ निर्माण मंत्री इंजीनियर शैलेंद्र कुमार आज गुरुवार (14 मई) को भागलपुर पहुंचे, जहां उन्होंने क्षतिग्रस्त विक्रमशिला सेतु का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान इंजीनियर शैलेंद्र कुमार ने बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन यानी बीआरओ द्वारा सैन्य स्तर पर बनाए जा रहे बेली ब्रिज के निर्माण कार्य और उसमें इस्तेमाल की जा रही सामग्री की गुणवत्ता की भी जांच की।

बेली पुल पर जल्द शुरू होगा परिचालन- मंत्री

इस मौके पर इंजीनियर शैलेंद्र कुमार ने कहा कि, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में सरकार इस पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है और तेजी से काम कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि, जल्द ही 10 से 15 दिनों के अंदर बेली पुल का निर्माण कर उसपर हल्के वाहनों का परिचालन शुरू कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि जल्द ही पुल के मरम्मत का भी कार्य शुरू कर दिया जाएगा। इसको लेकर हमने विभागीय इंजीनियर के साथ भी बैठक की है।

3 मई की रात गिरा था पुल का स्लैब

गौरतलब है कि बीते 3 मई की रात 12:30 बजे आसपास भागलपुर से उत्तर बिहार को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण विक्रमशिला सेतु क्षतिग्रस्त हो गया, जिससे आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया है। विक्रमशिला पुल के पाया नंबर 133 का एक स्लैब टूटकर गंगा नदी में गिर गया। हालांकि गनीमत की बात यह रही कि इस घटना में किसी प्रकार के जान-माल की कोई क्षति नहीं पहुंची।

मिली जानकारी के अनुसार पहले विक्रमशिला पुल के पाया नंबर 133 पोल के पास धंसाव हुआ, जिसकी जानकारी मिलने के तुरंत बाद गाड़ियों के आवागमन को बंद कर दिया गया था। इसके कुछ देर बाद ही पुल का वह हिस्सा (133-134 के बीच का) स्लैब टूटकर नदी में गिर गया।

तीन महीने में पुल के रिकवर होने की बात

विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने पर बिहार राज्य पुल निगम के अध्यक्ष चंद्रशेखर सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए बताया था कि, साल 2001 में विक्रमशिला पुल को तैयार किया गया था, जो यूपी पुल निगम के द्वारा बनाया गया था। इस मामले में वहां के कार्यपालक अभियंता को निलंबित किया गया है।

उन्होंने कहा था कि, फिलहाल आवागमन के लिए नाव और स्टीमर की व्यवस्था की जा रही है। चार लाइन का पुल निर्माण किया जा रहा है। वो बनने पर सभी समस्याओं का समाधान हो जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने तीन महीने के अंदर विक्रमशिला पुल को रिकवर कराने बात कही थी।

हादसे का बना रहता है डर

स्थानीय लोगों का कहना है कि, विक्रमशिला सेतु के टूटने से सबसे ज्यादा परेशानी रोजमर्रा के यात्रियों के साथ-साथ शादी समारोह में शामिल होने वाले परिवारों को हो रही है। बावजूद इसके लोग हर मुश्किल को पार कर अपने रिश्तों और परंपराओं को निभाने में जुटे हुए हैं। लोगों का कहना है कि कई बार नावों पर क्षमता से अधिक भीड़ होने के कारण हादसे का डर भी बना रहता है, लेकिन मजबूरी में लोग यह खतरा मोल ले रहे हैं।

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