चंडीगढ़। हरियाणा के रोहतक जिले में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत हुए कथित वित्तीय गबन और सरकारी धन के दुरुपयोग मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के सख्त रवैये के बाद राज्य सरकार तुरंत एक्शन में आ गई है। सरकार ने इस पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (विजिलेंस) को सौंप दी है।

मुख्य सचिव ने 15 अक्टूबर को जारी किया था आदेश

चीफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की खंडपीठ के समक्ष हुई सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से जानकारी दी गई कि मुख्य सचिव ने 15 अक्टूबर को ही इस मामले की जांच विजिलेंस ब्यूरो को भेजने संबंधी पत्र जारी कर दिया था। सरकार द्वारा जांच प्रक्रिया पूरी करने के लिए अदालत से समय मांगने पर हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 15 फरवरी 2027 तय की है।

15 फरवरी 2027 तक देनी होगी विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई की तारीख (15 फरवरी 2027) तक सरकार को विजिलेंस जांच और मामले में की गई पूरी कार्रवाई की विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश करनी होगी। अदालत के इस आदेश के बाद संबंधित विभाग में हड़कंप मच गया है।

वर्ष 2023 की मनरेगा लोकपाल रिपोर्ट से जुड़ा है मामला

यह पूरा प्रकरण रोहतक जिले में मनरेगा लोकपाल की वर्ष 2023 की रिपोर्ट से सामने आया है। मनरेगा लोकपाल ने अपनी जांच रिपोर्ट में सरकारी धन के वित्तीय गबन की पुष्टि की थी और इस पूरे मामले में दोषियों के खिलाफ आपराधिक केस दर्ज करने की सिफारिश की थी। इसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा, जहां अदालत के दबाव के बाद सरकार को विजिलेंस जांच के आदेश देने पड़े हैं।

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