रुड़की निवासी समीर अली शेख अपने चार वर्षीय बेटे अब्दुल रहीम और छह वर्षीय बेटी रहमत के साथ पैदल पिरान कलियर पहुंचे. दोनों बच्चों ने गर्मी और तपती सड़क के बावजूद करीब 8 से 10 किलोमीटर की यात्रा पिता के साथ पूरी की.

रुड़की. हरिद्वार जिले के रुड़की में सालाना उर्स के दौरान एक परिवार की पैदल यात्रा चर्चा का विषय बनी हुई है. रुड़की निवासी समीर अली शेख अपने चार वर्षीय बेटे अब्दुल रहीम और छह वर्षीय बेटी रहमत के साथ करीब 8 से 10 किलोमीटर पैदल चलकर पिरान कलियर स्थित साबिर पाक की दरगाह पहुंचे.

हाथों में झंडे लिए दोनों बच्चे अपने पिता के साथ तपती सड़क पर चलते रहे. चिलचिलाती धूप के बावजूद बच्चों ने रास्ते में कदम नहीं रोके, जिसे देखकर राहगीर उनकी हिम्मत की सराहना करते नजर आए.

उर्स में पहुंचा परिवार

पिरान कलियर में इन दिनों सालाना उर्स चल रहा है. चांद की 12 तारीख को जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी मनाया जाता है. इसी दौरान हजरत अलाउद्दीन अली अहमद साबिर पाक रहमतुल्लाह अलैह का 758वां सालाना उर्स भी मनाया जा रहा है.

समीर अली शेख अपने दोनों बच्चों के साथ रुड़की से पैदल ही कलियर शरीफ के लिए रवाना हुए. करीब 8 से 10 किलोमीटर की इस यात्रा के दौरान चार वर्षीय अब्दुल रहीम और छह वर्षीय रहमत पिता के साथ कदम से कदम मिलाकर चलते रहे.

राहगीरों ने सराहा

तपती सड़क पर झंडे लेकर चलते बच्चों को देखकर रास्ते में मौजूद लोगों का ध्यान उनकी ओर गया. कई राहगीर बच्चों के हौसले की तारीफ करते नजर आए.

परिवार की यह यात्रा उनके लिए आस्था और मोहब्बत के इजहार का माध्यम रही. वहीं, उर्स के मुख्य दिन और बड़ी रोशनी के मौके पर देश-विदेश से बड़ी संख्या में जायरीन पिरान कलियर शरीफ पहुंच रहे हैं.

आस्था की तस्वीर

अकीदत के साथ तय किए गए इस पैदल सफर में नन्हे बच्चों का जज्बा लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना. रुड़की से कलियर तक बच्चों की यह यात्रा देखने वाले लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी रही.