राज्य सूचना आयोग ने कहा कि RTI आवेदन दाखिल करने से किसी नागरिक को रोकना कानूनन गलत है। आयोग ने शुगर मिल्स को 15 दिन में मुफ्त जानकारी देने का आदेश दिया।
पंचकूला। राज्य सूचना आयोग ने एक कड़े आदेश में स्पष्ट किया है कि कोई भी राज्य लोक सूचना अधिकारी (SPIO) किसी नागरिक को आरटीआई आवेदन दाखिल करने से न तो रोक सकता है और न ही उन पर कोई प्रतिबंध लगा सकता है। सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत एसपीआईओ को ऐसी कोई शक्ति प्राप्त नहीं है। यह महत्वपूर्ण टिप्पणी आयोग ने कुरुक्षेत्र जिले की शाहाबाद शुगर मिल्स लिमिटेड से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान की है। आयोग ने कहा कि एक लोक सूचना अधिकारी को केवल अधिनियम के दायरे में रहकर कार्य करना चाहिए, न कि आवेदकों को डराने या उन्हें भविष्य में आवेदन करने से रोकने के लिए अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करना चाहिए।
आवेदन से रोकने पर कड़ी आपत्ति
मामले के शिकायतकर्ता संदीप शरण ने नवंबर 2025 में आरटीआई के जरिए जानकारी मांगी थी। सूचना न मिलने पर उन्होंने आयोग में शिकायत की। सुनवाई के दौरान पता चला कि एसपीआईओ ने जनवरी 2026 में एक पत्र लिखकर शिकायतकर्ता को बार-बार आवेदन देने से रोका था और कार्रवाई की धमकी भी दी थी। सूचना आयुक्त डॉ. अजय कुमार सूरा ने इस व्यवहार पर गंभीर आपत्ति जताते हुए कहा कि किसी नागरिक को आरटीआई देने से रोकना या उन्हें “ब्लैकलिस्ट” करना कानूनन गलत है। आयोग ने स्पष्ट किया कि यदि कोई आवेदन बार-बार दोहराया जाता है, तब भी प्रत्येक आवेदन पर अलग से विचार करके ही उसका जवाब देना या कानूनी कारणों से उसे अस्वीकार करना होगा।
सूचना निशुल्क देने के निर्देश
आयोग ने शाहाबाद शुगर मिल्स के एसपीआईओ को 15 दिनों के भीतर शिकायतकर्ता को मांगी गई संपूर्ण जानकारी सत्यापित रूप में निशुल्क उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। इसके अलावा, आयोग ने अधिकारी से यह जवाब भी मांगा है कि उन्हें किस धारा के तहत एक आवेदक को आवेदन करने से रोकने का अधिकार मिला? मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर 2026 को होगी। यह फैसला उन सभी सरकारी अधिकारियों के लिए एक बड़ा सबक है, जो जानकारी देने से बचने के लिए आवेदकों पर दबाव बनाते हैं। सूचना आयोग का यह आदेश आरटीआई कार्यकर्ताओं और आम जनता के लिए पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ी जीत माना जा रहा है।

