हेमंत शर्मा, इंदौर। देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में आयोजित स्वच्छता कार्यशाला में राजस्थान के स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर और स्वच्छता विशेषज्ञ के.के. गुप्ता ने साफ संदेश दिया कि स्वच्छता केवल सरकारी अभियान नहीं, बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि जब तक लोगों की सोच नहीं बदलेगी, तब तक कोई भी शहर पूरी तरह स्वच्छ नहीं बन सकता।

कार्यशाला में इंदौर महापौर पुष्यमित्र भार्गव, बुरहानपुर महापौर माधुरी पटेल, संभागायुक्त सुदाम खाड़े, अपर आयुक्त प्रखर सिंह, जेडी एस.के. सिन्हा सहित कई जनप्रतिनिधि और नगर निकायों के अधिकारी मौजूद रहे।

“कागजों की नहीं, जमीन पर दिखनी चाहिए स्वच्छता”

के.के. गुप्ता ने कहा कि कई जगह स्वच्छता सिर्फ रिपोर्टों और कागजों तक सीमित रह जाती है, जबकि असली बदलाव जमीन पर दिखाई देना चाहिए। उन्होंने कहा कि हर घर से गीला, सूखा, सैनिटरी और विशेष श्रेणी के कचरे का अलग-अलग संग्रह जरूरी है। इससे कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण आसान होगा और शहर साफ रहेंगे।

प्लास्टिक बनाने वालों पर कार्रवाई की मांग

उन्होंने कहा कि केवल आम लोगों पर जुर्माना लगाने से शहर प्लास्टिक मुक्त नहीं होंगे। सरकार को अवैध प्लास्टिक बनाने और बेचने वालों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। जब तक उत्पादन स्तर पर रोक नहीं लगेगी, तब तक प्लास्टिक पर पूरी तरह नियंत्रण संभव नहीं है।

डूंगरपुर मॉडल का किया जिक्र

के.के. गुप्ता ने अपने डूंगरपुर कार्यकाल का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां यदि कोई व्यक्ति गंदगी की फोटो भेजता था तो उसे पुरस्कार दिया जाता था। इसके बाद संबंधित व्यक्ति या दुकानदार से सफाई कराकर स्पॉट फाइन भी वसूला जाता था। उनका कहना था कि कानून का सख्ती से पालन होगा तभी शहर वास्तव में साफ बनेंगे।

खाली प्लॉट बने गंदगी के अड्डे

उन्होंने कहा कि शहरों में खाली पड़े भूखंड गंदगी के सबसे बड़े केंद्र बनते जा रहे हैं। ऐसे प्लॉट मालिकों को नोटिस देकर सफाई करानी चाहिए। यदि वे सफाई नहीं कराते हैं तो नगर निकाय खुद सफाई कराकर खर्च और जुर्माना उनसे वसूले। लगातार लापरवाही होने पर ऐसे भूखंडों को सील करने जैसे कदमों पर भी विचार होना चाहिए।

रात में सफाई, सुबह चमके शहर

गुप्ता ने सुझाव दिया कि बाजार और मुख्य सड़कों की सफाई रात में होनी चाहिए, ताकि दिन में यातायात प्रभावित न हो और सुबह शहर साफ-सुथरा दिखाई दे। साथ ही सार्वजनिक शौचालयों की नियमित सफाई, पानी और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं भी हर समय उपलब्ध रहनी चाहिए।

मुख्यमंत्री की मॉनिटरिंग का किया जिक्र

उन्होंने कहा कि राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा स्वयं स्वच्छता कार्यों की नियमित समीक्षा करते हैं और अधिकारियों से लगातार फीडबैक लेते हैं। उनके अनुसार शीर्ष स्तर की मॉनिटरिंग से स्वच्छता अभियान को गति मिलती है और प्रशासनिक जवाबदेही भी बढ़ती है।

“इंदौर और डूंगरपुर में सोच का फर्क नहीं”

के.के. गुप्ता ने कहा कि इंदौर और डूंगरपुर की स्वच्छता की मूल सोच एक जैसी है। फर्क केवल शहरों के आकार का है। उनका मानना है कि सीमित संसाधनों के बावजूद यदि जनभागीदारी और प्रशासन मिलकर काम करें तो कोई भी शहर स्वच्छता में नई पहचान बना सकता है।

जनभागीदारी को बताया सबसे बड़ी ताकत

उन्होंने कहा कि विकसित भारत और विकसित राज्यों का सपना तभी पूरा होगा, जब हर नागरिक अपने घर, गली और मोहल्ले की सफाई को अपनी जिम्मेदारी समझे। स्वच्छता केवल नगर निगम या सरकार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है।

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