अविनाश श्रीवास्तव, रोहतास। सासाराम में सिविल कोर्ट के नए भवन के निर्माण को लेकर एक नया पेंच फंस गया है। प्रस्तावित निर्माण स्थल की जमीन को लेकर जिला प्रशासन और अधिवक्ताओं के आमने-सामने आने के बाद स्थिति गंभीर हो गई है। विवाद गहराने पर प्रधान जिला जज अनुज कुमार जैन ने खुद मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और अंचल अधिकारी को सख्त निर्देश दिए।

क्या है पूरा विवाद?
सासाराम में सिविल कोर्ट के नए भवन के निर्माण के लिए चिह्नित की गई जमीन पर स्थानीय अधिवक्ताओं ने अपना दावा ठोक दिया है। अधिवक्ताओं का कहना है कि यह पूरी जमीन मुख्तारखाना की है, जिसे एक जमींदार द्वारा पूर्व में अधिवक्ताओं को दान के रूप में दिया गया था।
अधिवक्ताओं का सीधा आरोप है कि अंचल कार्यालय के अमीन द्वारा इस जमीन की गलत तरीके से पैमाइश की जा रही है। उनके अनुसार, जिस भूमि की पैमाइश की जा रही है, उसे केसरे हिंद (सरकारी जमीन) बताया जा रहा है, जो सरासर गलत है। अधिवक्ताओं का दावा है कि गलत जमीन की माप कर प्रशासनिक स्तर पर भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है, ताकि निर्माण कार्य का रास्ता साफ किया जा सके।
जिला जज ने लिया जायजा और दिए निर्देश
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रधान जिला जज अनुज कुमार जैन ने तुरंत प्रभाव से कार्यस्थल का दौरा किया। उन्होंने मौके पर पहुंचकर स्थिति का बारीकी से निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने अंचलाधिकारी (CO) खुशबू गौतम को भी मौके पर तलब किया और जमीन के दस्तावेजों तथा उसकी वास्तविक स्थिति के संबंध में विस्तृत जानकारी प्राप्त की।
जिला जज ने अंचलाधिकारी को स्पष्ट निर्देश दिया है कि जमीन की सही तरीके से और पूरी पारदर्शिता के साथ पैमाइश (मापी) की जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि विवादित भूमि का असली मालिक कौन है और इसका कानूनी स्टेटस क्या है। पैमाइश की पूरी रिपोर्ट सौंपने के बाद ही निर्माण कार्य को लेकर आगे की कोई प्रशासनिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

