अविनाश श्रीवास्तव/सासाराम। राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचू के अनशन के दौरान पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई और देश भर में लगातार हो रहे पेपर लीक मामलों के खिलाफ सासाराम में भारी आक्रोश देखा गया। विभिन्न वामपंथी दलों के कार्यकर्ताओं ने संयुक्त रूप से शहर में विरोध मार्च निकाला और केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

​छात्र-युवा आक्रोश दिवस के रूप में निकाला गया मार्च

​सासाराम में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA), ऑल इंडिया यूथ एसोसिएशन (AYA) और भाकपा माले (CPI-ML) के कार्यकर्ताओं ने मिलकर एक साझा प्रतिरोध मार्च निकाला। प्रदर्शनकारी हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर सासाराम के मुख्य मार्गों से गुजरे। इस दौरान सरकार विरोधी नारों से पूरा इलाका गूंज उठा। यह मार्च शहर के प्रमुख रास्तों से होते हुए अंत में पोस्ट ऑफिस चौराहा पहुंचा, जहां एक सभा में तब्दील हो गया। वाम दलों ने इस दिन को छात्र-युवा आक्रोश दिवस के रूप में मनाया।

​सोनम वांगचू को हिरासत में लेने पर फूटा गुस्सा

​प्रदर्शनकारियों ने मुख्य रूप से पर्यावरणविद् और एक्टिविस्ट सोनम वांगचू के साथ दिल्ली पुलिस के रवैये की कड़ी निंदा की। वक्ताओं ने कहा कि सोनम वांगचू शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को लेकर अनशन पर बैठे थे, लेकिन केंद्र सरकार के इशारे पर पुलिस ने उन्हें जबरन धरना स्थल से उठाकर अस्पताल पहुंचा दिया। वाम दलों ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन और तानाशाही करार दिया है। उनका कहना है कि सरकार जन आंदोलनों को दबाने की कोशिश कर रही है, जिसे देश के युवा और छात्र कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे।

​नीट पेपर लीक और शिक्षा मंत्री की चुप्पी पर भी हमला

​इस प्रदर्शन के दौरान देश में चरम पर पहुंच चुके शिक्षा तंत्र के भ्रष्टाचार का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। नेताओं ने कहा कि देश भर में लगातार प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक हो रहे हैं। नीट (NEET) परीक्षा में धांधली और पेपर लीक के कारण कई प्रतिभाशाली छात्रों ने मानसिक तनाव में आकर आत्महत्या तक कर ली है। इन मौतों की नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी सीधे तौर पर भारत सरकार की है।
​आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि इतने बड़े घोटालों और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ होने के बावजूद सरकार ने अपने दोषी शिक्षा मंत्री के खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। उन्होंने कहा कि सरकार दोषियों को बचाने में लगी हुई है।

​उग्र आंदोलन की चेतावनी

​सासाराम में हुए इस प्रदर्शन के माध्यम से वामपंथी दलों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने अपनी नीतियों में सुधार नहीं किया और युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ बंद नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और अधिक तीव्र किया जाएगा। प्रदर्शन में मुख्य रूप से छात्र और युवा नेता बड़ी संख्या में शामिल रहे, जिन्होंने शिक्षा व्यवस्था में सुधार और लोकतांत्रिक अधिकारों की बहाली की पुरजोर मांग की।