अविनाश श्रीवास्तव/सासाराम। जिले के सदर अस्पताल परिसर में जल-जमाव की विकराल समस्या ने आम लोगों और मरीजों के लिए भारी मुसीबत खड़ी कर दी है। महज एक मामूली बारिश के बाद ही अस्पताल परिसर किसी तालाब में तब्दील हो जाता है। गंदे पानी का यह जमावड़ा न केवल अस्पताल की कार्यप्रणाली को बाधित कर रहा है बल्कि संक्रामक बीमारियों को भी खुलेआम आमंत्रण दे रहा है।

​मलेरिया के बचाव का बोर्ड और आसपास गंदा पानी

​विडंबना यह है कि जिस परिसर में जगह-जगह मलेरिया और अन्य बीमारियों से बचाव के लिए जागरूकता होर्डिंग लगाए गए हैं, उसी के ठीक नीचे और आसपास गंदा और स्थिर पानी जमा है। यह गंदा पानी मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार कर रहा है। अस्पताल प्रशासन की लापरवाही का आलम यह है कि स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने वाले इन पोस्टरों के नीचे ही बीमारियां फैलने की पूरी व्यवस्था मौजूद है।

​जल निकासी का न होना, प्रशासन की विफलता

​अस्पताल के जनरल वार्ड के बाहर की स्थिति सबसे अधिक दयनीय है। परिसर में पानी की निकासी के लिए कोई भी सुदृढ़ ड्रेनेज व्यवस्था नहीं है। पानी निकलने का कोई रास्ता न होने के कारण यह गंदा पानी दिनों-दिन वहीं पड़ा रहता है, जिससे पूरे इलाके में दुर्गंध फैली रहती है। मरीज और उनके परिजन इसी गंदे पानी के बीच से होकर वार्ड तक पहुंचने को मजबूर हैं जो संक्रमण के खतरे को कई गुना बढ़ा देता है।

​स्थानीय लोगों और मरीजों का आक्रोश

​अस्पताल में इलाज के लिए आए मरीजों और उनके स्वजनों का कहना है कि वे बार-बार इस समस्या को अस्पताल प्रशासन के संज्ञान में ला चुके हैं लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। ऐसा प्रतीत होता है कि अस्पताल प्रबंधन इस गंभीर समस्या को नजरअंदाज कर रहा है। मरीजों का कहना है कि जहां उन्हें स्वस्थ होने के लिए लाया जाता है वहां की गंदगी उन्हें और अधिक बीमार बना रही है।
​यदि अस्पताल प्रशासन ने इस समस्या पर जल्द ही ध्यान नहीं दिया, तो आने वाले मानसून के दिनों में स्थिति और भी भयावह हो सकती है। जल-जमाव की यह समस्या सासाराम सदर अस्पताल की व्यवस्था पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा कर रही है। अब देखना यह होगा कि कब तक प्रशासन इस पर कोई ठोस कदम उठाता है।