अनमोल मिश्रा, सतना। हौसला बुलंद हो तो कोई भी चुनौती मंजिल की राह नहीं रोक सकती। इसी जज्बे और हिम्मत की मिसाल हैं माधवी कुमारी उइके। दिव्यांग होने के बावजूद उन्होंने अपनी मेहनत और आत्मविश्वास से एक ऐसी पहचान बनाई है, जो युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है। 27 सितंबर को सतना जिले के कोठी में आयोजित होने वाली जय हिंद मैराथन में माधवी कुमारी उइके भी हिस्सा लेंगी। वे इस मैराथन में केवल प्रतिभागी ही नहीं, बल्कि रोल मॉडल के रूप में युवाओं को प्रेरित करती नजर आएंगी।
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माधवी कुमारी उइके प्राथमिक शाला झल्ली टोला, दिदौँध में शिक्षिका हैं। शिक्षा के क्षेत्र में अपनी जिम्मेदारी निभाने के साथ-साथ वे फिटनेस को लेकर भी लगातार जागरूक हैं। बताया जाता है कि वे लगभग सात वर्षों से नियमित रूप से जिम कर रही हैं। उनकी मेहनत और आत्मविश्वास यह संदेश देता है कि शारीरिक चुनौतियां कभी भी इंसान के हौसले से बड़ी नहीं हो सकतीं। उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति की एक मिसाल तब भी देखने को मिली, जब उन्होंने मैहर स्थित मां शारदा के दर्शन के लिए सीढ़ियां चढ़कर मंदिर तक पहुंचने का संकल्प पूरा किया। उनके इस जज्बे ने आसपास के लोगों को भी प्रेरित किया।
माधवी का संदेश—हौसला रखिए, कदम बढ़ाइए
जय हिंद मैराथन में शामिल होने की अपील करते हुए माधवी कुमारी उइके ने युवाओं से कहा कि स्वस्थ शरीर, मजबूत मन और सकारात्मक सोच के लिए खेल एवं फिटनेस को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। उन्होंने अधिक से अधिक युवाओं से 27 सितंबर को कोठी पहुंचकर जय हिंद मैराथन में भाग लेने की अपील की है। माधवी की कहानी सिर्फ दौड़ में शामिल होने की कहानी नहीं, बल्कि यह उस जज्बे की कहानी है जो मुश्किल परिस्थितियों में भी इंसान को आगे बढ़ने की ताकत देता है। जय हिंद मैराथन में उनकी भागीदारी निश्चित तौर पर अन्य प्रतिभागियों के लिए भी प्रेरणा का संदेश होगी।
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