पश्चिमी दिल्ली के जनकपुरी इलाके में एक निजी स्कूल के भीतर तीन साल की बच्ची के साथ कथित दुष्कर्म के मामले को लेकर राजनीति तेज हो गई है। AAAP के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज (Saurabh Bharadwaj) ने इस मामले में भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (Rekha Gupta) की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं। दरअसल, मामला एक निजी स्कूल का है, जहां 57 वर्षीय कर्मचारी पर तीन साल की बच्ची के साथ यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म का आरोप लगा है। यह घटना एक मई को सामने आई, जब पीड़िता की मां ने जनकपुरी थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि स्कूल के ही एक कर्मचारी ने उनकी बेटी के साथ गलत काम किया।

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि राजधानी में बच्चियां सुरक्षित नहीं हैं और इतनी गंभीर घटना के बावजूद सरकार की ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर जवाब देने से बच रही है। AAP नेता ने मांग की कि मामले की निष्पक्ष और तेज जांच हो तथा आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही स्कूल प्रशासन की भूमिका की भी जांच किए जाने की मांग उठाई गई है।

शिकायत के अनुसार, बच्ची 30 अप्रैल को अपने दाखिले के दूसरे दिन स्कूल गई थी। घर लौटने के बाद उसने दर्द की शिकायत की। मां द्वारा पूछताछ किए जाने पर बच्ची ने कथित तौर पर बताया कि स्कूल के एक अलग हिस्से में ले जाकर एक व्यक्ति ने उसके साथ गलत काम किया। इसके बाद पीड़िता की मां ने एक मई को जनकपुरी थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर Delhi Police ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया। पुलिस के मुताबिक, बच्ची द्वारा आरोपी की पहचान किए जाने के बाद स्कूल के 57 वर्षीय केयरटेकर को गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपी को अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

क्या कहा सौरभ भारद्वाज ने?

सौरभ भारद्वाज ने बयान जारी कर कहा, “कल्पना कीजिए कि एक बच्ची का निजी स्कूल की नर्सरी में दाखिला कराया जाता है और वह पहले ही दिन घर लौटती है, तो माता-पिता को पता चलता है कि 57 वर्षीय केयरटेकर ने उसके साथ दुष्कर्म किया है।” उन्होंने आरोपी को जमानत मिलने पर सवाल उठाते हुए कहा कि इतने गंभीर मामले में पांच दिनों के भीतर बेल मिल जाना चिंताजनक है। भारद्वाज ने आरोप लगाया कि Delhi Police के पश्चिमी जिला डीसीपी ने पीड़ित परिवार का सहयोग करने के बजाय उन्हें धमकाने का काम किया। हालांकि, पुलिस की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

AAP नेता ने दावा किया कि जिस स्कूल में यह घटना हुई, वह दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद  के घर से महज दो मिनट की दूरी पर स्थित है। उन्होंने मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार इस मामले को दबाने की कोशिश कर रही है। सौरभ भारद्वाज ने मदर्स डे का जिक्र करते हुए कहा, “रेखा गुप्ता किस बात का मदर्स डे मना रही हैं?” उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बच्चियों की सुरक्षा के मुद्दे पर गंभीर नहीं है।

पुलिस के अनुसार, अभियोजन पक्ष के कड़े विरोध के बावजूद 7 मई को द्वारका की एक अदालत ने आरोपी 57 वर्षीय केयरटेकर को जमानत दे दी। मामले की जांच जारी है और स्कूल परिसर के सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि घटना के दौरान क्या हुआ और क्या किसी अन्य व्यक्ति की भी इसमें भूमिका थी।

इस बीच, पीड़िता की मां ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले की सूचना दिए जाने के तुरंत बाद उचित कार्रवाई नहीं की गई। मां का यह भी दावा है कि स्कूल का एक शिक्षक भी इस मामले में शामिल था, जिससे पुलिस ने पूछताछ की थी। परिवार ने पुलिस जांच की प्रक्रिया पर भी नाराजगी जताई है। आरोप है कि पूछताछ के दौरान बच्ची और परिवार को कई घंटों तक थाने में इंतजार कराया गया, जिससे उन्हें मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि, पश्चिमी जिला डीसीपी ने इन आरोपों को लेकर बयान जारी करते हुए कहा कि बच्ची की मां की शिकायत मिलते ही तुरंत कार्रवाई की गई थी। पुलिस के मुताबिक, पीड़िता की चिकित्सकीय जांच भी तत्काल कराई गई और संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया गया।

पुलिस ने बताया कि कानून के अनुसार स्कूल परिसर से संबंधित सीसीटीवी और डीवीआर फुटेज समेत अन्य अहम सबूत भी जब्त किए गए हैं। मामले की जांच वैज्ञानिक साक्ष्यों, फॉरेंसिक जांच, गवाहों के बयानों और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर की जा रही है। बयान में कहा गया कि कुछ मीडिया रिपोर्टों में पुलिस अधिकारियों पर परिवार को परेशान करने और धमकाने के जो आरोप लगाए गए हैं, वे झूठे और बेबुनियाद हैं। पुलिस का कहना है कि पूरे मामले में निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया है।

पुलिस ने कहा कि मामले की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए पीड़िता और उसके परिवार को उचित माहौल उपलब्ध कराया गया था तथा पूछताछ केवल कानूनी प्रक्रिया और परामर्श के लिए की गई। लिस के बयान के अनुसार, पूछताछ के दौरान शिकायतकर्ता और पीड़िता के साथ संवेदनशीलता बरती गई। बयान में कहा गया कि डीसीपी (पश्चिम) कभी भी पीड़ित परिवार से नहीं मिले और उन पर लगाए गए धमकाने या उत्पीड़न के आरोप पूरी तरह निराधार हैं। पुलिस ने बताया कि पीड़िता द्वारा पहचान किए जाने के बाद आरोपी 57 वर्षीय स्कूल केयरटेकर को तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया था। अदालत के समक्ष पीड़िता का बयान दर्ज कराया गया और स्कूल परिसर से सीसीटीवी तथा डीवीआर फुटेज सहित अन्य अहम साक्ष्य भी जब्त किए गए।

पुलिस के मुताबिक, जांच वैज्ञानिक साक्ष्यों, फॉरेंसिक रिपोर्ट, गवाहों के बयान और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष एवं पेशेवर तरीके से की जा रही है। मामले में आरोपी को जमानत दिए जाने पर पुलिस ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने अदालत में जमानत अर्जी का कड़ा विरोध किया था। इसके बावजूद अदालत ने आरोपी को जमानत दे दी। पुलिस का कहना है कि अदालत के विस्तृत आदेश का अध्ययन किया जा रहा है और कानून के अनुसार आगे की कानूनी कार्रवाई पर विचार किया जा रहा है।

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