नई दिल्ली। एक सप्ताह से अधिक समय तिहाड़ जेल में बिताने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सह-संयोजक सौरभ दास (Saurav Das) ने अब न्यायपालिका को लेकर तीखी टिप्पणी की है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार (Gyanesh Kumar) के खिलाफ जवाबदेही की मांग उठाने वाले सौरभ दास ने नाम लिए बिना कई जजों पर देश को धोखा देने और संविधान के साथ धोखाधड़ी करने के आरोप लगाए हैं। उनके इस बयान से न्यायपालिका को लेकर उनका विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
कई जजों पर लगाए गंभीर आरोप
सौरभ दास ने अपने ताजा बयान में न्यायपालिका के कुछ सदस्यों को निशाने पर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कई जजों ने देश के साथ धोखा किया है और संविधान के साथ धोखाधड़ी की है। हालांकि, उन्होंने अपने बयान में किसी जज का नाम नहीं लिया और न ही आरोपों के समर्थन में कोई विस्तृत तथ्य इस जानकारी में सामने आए हैं।
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा पर टिप्पणी को लेकर विवाद
सीजेपी के गठन से पहले लीगल रिपोर्टिंग करने वाले सौरभ दास अक्सर अदालतों की कार्यप्रणाली और न्यायिक फैसलों पर सवाल उठाते रहे हैं। दिल्ली हाई कोर्ट की जज जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को लेकर की गई टिप्पणियों के मामले में भी वह अवमानना की कार्यवाही का सामना कर रहे हैं। दिल्ली के कथित शराब घोटाले से जुड़े मामले की सुनवाई जब जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत में हुई थी, तब दास ने न्यायाधीश को लेकर कई आरोप लगाए थे। बाद में आम आदमी पार्टी (आप) के नेता अरविंद केजरीवाल समेत अन्य नेताओं ने भी इन टिप्पणियों को साझा किया था। हालांकि, किसी न्यायाधीश के खिलाफ लगाए गए आरोपों और अदालत की ओर से उन पर की गई कानूनी कार्रवाई को अलग-अलग तथ्यों के रूप में देखना जरूरी है।
SIR प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट पर भी उठाए सवाल
सौरभ दास विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर भी न्यायपालिका की भूमिका पर सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने कथित अनियमितताओं के संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट को भी जिम्मेदार ठहराया था। एसआईआर मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया है, जिसके तहत मतदाताओं के विवरण की जांच और सूची को अद्यतन करने का काम किया जाता है। इस प्रक्रिया को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों और पक्षों की ओर से सवाल उठाए जाते रहे हैं। दास की टिप्पणियां इसी व्यापक बहस के बीच सामने आई हैं। हालांकि, उनके आरोपों की पुष्टि के लिए संबंधित मामलों के रिकॉर्ड और न्यायिक आदेशों को देखना आवश्यक है।
‘जजों की जवाबदेही समय की मांग’
सौरभ दास ने अपने बयान में कहा, “मौजूदा समय को देखते हुए एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम। कृपया शामिल हों। जजों की जवाबदेही समय की मांग है। दुर्भाग्य से कई जजों ने देश को धोखा दिया है और संविधान के साथ फ्रॉड किया है। उनकी जवाबदेही भी उचित समय पर तय की जाएगी।” दास ने यह टिप्पणी ‘अकाउंटेबिलिटी ऑफ जजेज ऑफ द सुप्रीम कोर्ट एंड हाई कोर्ट’ विषय पर मंगलवार को दिल्ली में होने वाले कार्यक्रम के संदर्भ में की। हालांकि, उन्होंने अपने बयान में किसी न्यायाधीश का नाम नहीं लिया और आरोपों के समर्थन में विशिष्ट साक्ष्य भी प्रस्तुत नहीं किए।
जजों की जवाबदेही पर कार्यक्रम में जुटेंगे कई प्रमुख वक्ता
सौरभ दास ने जिस कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की है, उसका विषय सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के न्यायाधीशों की जवाबदेही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस एएस ओका, वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और प्रशांत भूषण समेत कई वक्ता शामिल होंगे। कार्यक्रम में न्यायपालिका की जवाबदेही से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। हालांकि, कार्यक्रम के विस्तृत एजेंडे और वक्ताओं के निर्धारित विषयों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती है। सौरभ दास इससे पहले भी न्यायपालिका और न्यायिक फैसलों को लेकर तीखी टिप्पणियां कर चुके हैं। दिल्ली हाई कोर्ट की जज जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को लेकर की गई टिप्पणियों के मामले में भी वह अवमानना की कार्यवाही का सामना कर रहे हैं।
जस्टिस कौल ने पूर्व CJI की कार्यशैली पर उठाए सवाल
पूर्व न्यायाधीश संजय किशन कौल ने न्यायिक नियुक्तियों के मामले में पूर्व प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की कार्यशैली की आलोचना की है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, जस्टिस कौल ने आरोप लगाया कि चंद्रचूड़ सरकार के प्रति जरूरत से ज्यादा विनम्र थे। यह टिप्पणी न्यायिक नियुक्तियों की प्रक्रिया और उसमें न्यायपालिका तथा सरकार के बीच संबंधों को लेकर चर्चा के बीच सामने आई है। हालांकि, इस टिप्पणी के विस्तृत संदर्भ और जस्टिस कौल के पूरे बयान की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
सौरभ दास ने अपने लेख की ओर दिलाया ध्यान
जस्टिस कौल की टिप्पणी के बाद सौरभ दास ने पूर्व CJI चंद्रचूड़ को लेकर लिखे अपने लेख को साझा किया और लोगों से उसे पढ़ने की अपील की। इससे न्यायिक नियुक्तियों और न्यायपालिका की जवाबदेही से जुड़े मुद्दे एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं। दास इससे पहले भी न्यायाधीशों की जवाबदेही और न्यायिक संस्थाओं की भूमिका को लेकर तीखी टिप्पणियां कर चुके हैं। उन्होंने हाल में सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के न्यायाधीशों की जवाबदेही के विषय पर आयोजित होने वाले एक कार्यक्रम में शामिल होने की अपील भी की थी।
न्यायिक नियुक्तियों और जवाबदेही पर चर्चा
न्यायिक नियुक्तियों की प्रक्रिया में कॉलेजियम की भूमिका, सरकार के साथ उसका संवाद और नियुक्तियों को लेकर पारदर्शिता लंबे समय से सार्वजनिक चर्चा के विषय रहे हैं। जस्टिस कौल की टिप्पणी और सौरभ दास की ओर से लेख साझा किया जाना इसी बहस के संदर्भ में देखा जा सकता है।
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