एक नवंबर 2026 से खाद्य तेल, प्लास्टिक, इलेक्ट्रिकल-इलेक्ट्रॉनिक और टायर वेस्ट स्क्रैप की खरीद पर दो प्रतिशत जीएसटी टीडीएस काटने का प्रावधान लागू हुआ है. अपंजीकृत कारोबारियों से इन वस्तुओं की खरीद करने वाले पंजीकृत व्यापारियों को आरसीएम के तहत जीएसटी जमा करना होगा.
कानपुर. स्क्रैप कारोबार में कर चोरी रोकने के लिए केंद्र सरकार ने जीएसटी के दायरे का विस्तार किया है. एक नवंबर 2026 से उपयोग किए हुए खाद्य तेल, प्लास्टिक वेस्ट, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक वेस्ट के साथ बेकार टायर स्क्रैप की खरीद पर भी दो प्रतिशत जीएसटी टीडीएस काटने का प्रावधान लागू हो गया है. इसके अलावा, अपंजीकृत कारोबारियों से इन वस्तुओं की खरीद करने वाले पंजीकृत व्यापारियों को रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म (आरसीएम) के तहत जीएसटी जमा करना होगा.
इन वस्तुओं पर लागू नियम
टैक्स मामलों के अधिवक्ता एवं सलाहकार संतोष कुमार गुप्ता के मुताबिक, जीएसटी अधिनियम की धारा 51 के तहत पहले 9 अक्टूबर 2024 को जारी अधिसूचना संख्या 25/2024 के माध्यम से मेटल स्क्रैप की खरीद पर टीडीएस काटने का प्रावधान लागू किया गया था.
अब केंद्रीय कर की 27 अक्टूबर 2026 की अधिसूचना संख्या 07/2026 के जरिए इस व्यवस्था का विस्तार किया गया है. इसके तहत उपयोग किया हुआ खाद्य तेल, प्लास्टिक वेस्ट, इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रॉनिक वेस्ट और टायर वेस्ट स्क्रैप को भी शामिल किया गया है. इन वस्तुओं की खरीद पर करयोग्य राशि का दो प्रतिशत टीडीएस काटना होगा.
खरीदार को जमा करना होगा टैक्स
नई व्यवस्था में आरसीएम का भी प्रावधान है. इसके तहत यदि कोई पंजीकृत व्यापारी इन श्रेणियों में आने वाला स्क्रैप किसी अपंजीकृत कारोबारी से खरीदता है, तो जीएसटी जमा करने की जिम्मेदारी खरीदार की होगी.
खरीदार को अपनी ओर से लागू कर का भुगतान करना होगा. इसके बाद वह नियमानुसार इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का दावा कर सकेगा.
छोटे कारोबारियों पर असर
जीएसटी सलाहकार एडवोकेट दीपक द्विवेदी ने कहा कि एक जुलाई 2017 को जीएसटी लागू करते समय कारोबार को आसान बनाने का भरोसा दिया गया था, लेकिन समय के साथ कर संबंधी प्रक्रियाओं और अनुपालन की जिम्मेदारियों में बढ़ोतरी हुई है.
सरकार का उद्देश्य स्क्रैप कारोबार में अपंजीकृत व्यापारियों को कर व्यवस्था के दायरे में लाना और राजस्व की चोरी रोकना है. हालांकि, टीडीएस कटौती और आरसीएम के प्रावधानों से छोटे कारोबारियों के लिए हिसाब-किताब रखना, रिटर्न दाखिल करना और जरूरी दस्तावेज तैयार करना पहले की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है.

