माछीवाड़ा साहिब: पंजाब में बारिश होने के साथ मालवा और दोआबा को जोड़ने वाले सतलुज दरिया में भी खतरे की घाटी बजने लगी है. दरिया पर बने शहीद भगत सिंह यादगारी पुल की स्लैब धंस गई है, जिससे यहां खतरा बढ़ गया है. इसके मद्देनजर प्रशासन ने इस पुल पर बड़े और भारी वाहनों की आवाजाही बंद कर दी है. आवाजाही बंद करने से लोगों को खासी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है, वही यहां के लोगों ने सरकार को पुल की जल्द मरम्मत करवाने की मांग की है. साथ ही आंदोलन करने की चेतावनी भी दी है.

मरम्मत को लेकर भारतीय किसान यूनियनों, ट्रक ऑपरेटरों, खन्ना-नवांशहर मार्ग पर स्थित ढाबा संचालकों और दुकानदारों ने पुल बंद करने से होनें वाले नुकसान को लेकर एक बैठक की जिसमें प्रशासन से पुल की तुरंत मरम्मत करवाने की मांग की गई. साथ ही सरकार को 10 दिन का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी गई कि यदि इस दौरान कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा.

इस मामले में भारतीय किसान मजदूर यूनियन के प्रधान दिलबाग सिंह ने बताया कि सतलुज नदी पर बना यह पुल वर्ष 2006 में शुरू हुआ था और पिछले करीब 20 वर्षों में इसकी स्लैब कम से कम 7 बार धंस चुकी है, जिसकी पहले कई बार मरम्मत भी की गई. उन्होंने कहा कि इस बार पुल की स्लैब धंसे हुए करीब डेढ़ साल से अधिक (लगभग पौने दो साल) हो चुके हैं, लेकिन लोक निर्माण विभाग (PWD) ने इसकी मरम्मत करने की बजाय केवल बड़े गार्डर लगाकर कारों की आवाजाही चालू रखी है, जबकि भारी वाहनों का प्रवेश पूरी तरह बंद कर दिया गया है.

उन्होंने कहा कि भारी गार्डर लगाए जाने से सबसे अधिक परेशानी उन किसानों को हो रही है जिनकी जमीन नदी के दोनों ओर है. उनके ट्रैक्टर-ट्रॉलियां, कृषि उपकरण और गन्ने से भरे वाहन पुल से नहीं गुजर पा रहे, जिससे खेती का काम प्रभावित हो रहा है.वहीं ट्रांसपोर्टरों ने बताया कि उनके हजारों वाहन अब रोपड़ और लुधियाना होते हुए लंबा रास्ता तय करने को मजबूर हैं, जिससे रोजाना लाखों रुपये का अतिरिक्त डीजल खर्च हो रहा है और उनका कारोबार प्रभावित हो रहा है.