मयंक श्रीवास्तव, अयोध्या. रामनगरी में शारदीय नवरात्रि (Sharad Navratri 2026) को लेकर सभी प्रमुख देवी मंदिरों को दुल्हन की तरह सजाया जा रहा है. मंदिरों में रंग-रोगन का काम पूरा हो चुका है और अब रोशनी और फूलों से श्रृंगार का दौर चल रहा है. नवरात्रि के स्वागत के लिए मंदिरों के शिखर से लेकर गर्भगृह तक विशेष सजावट की जा रही है.
पेंटिंग के बाद अब मंदिर परिसरों में आकर्षक रंग-बिरंगी झालर लाइटें लगाई जा रही हैं, जिससे रात में मंदिरों की छटा देखते ही बन रही है. नवरात्रि के प्रथम दिन मां के गर्भगृह को गेंदा, गुलाब और चमेली जैसे सुगंधित फूलों से भव्य रूप से सजाया जाएगा. मंदिरों के बाहर भी फूल-माला, चुनरी, नारियल और पूजन सामग्री की दुकानें लगने लगी हैं.
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भगवान राम की कुलदेवी के दरबार में सबसे ज्यादा रौनक
सबसे ज्यादा रौनक भगवान श्रीराम की कुलदेवी मां बड़ी देवकाली मंदिर (Badi Devkali Temple,) में देखी जा रही है. यहां साज-सज्जा का काम लगभग पूरा हो चुका है. मंदिर समिति के अनुसार, पेंटिंग के बाद अब पूरे परिसर को लाइटों से जगमग किया जा रहा है ताकि दूर से ही मां का दरबार भक्तों को अपनी ओर आकर्षित करे.
देवकाली मंदिर के महंत के अनुसार, यह मंदिर सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि रामवंश की आस्था का केंद्र है. मान्यता है कि इस मंदिर का निर्माण स्वयं भगवान राम के पूर्वजों ने कराया था. यहां मां बड़ी देवकाली एक प्राचीन शिला पर विराजमान हैं, जिनके साथ महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती तीनों स्वरूपों के दर्शन होते हैं.
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इस मंदिर से जुड़ी एक अनूठी परंपरा आज भी जीवित है. कहा जाता है कि जब श्रीराम मात्र सवा महीने के थे, तो उन्हें प्रथम दर्शन के लिए बड़ी देवकाली मंदिर ही लाया गया था. तभी से अयोध्या में आज भी हर नवजात शिशु को सबसे पहले राम की कुलदेवी का ही दर्शन कराया जाता है.हर साल शारदीय नवरात्रि पर देश के कोने-कोने से लाखों श्रद्धालु अयोध्या आते हैं. भक्त एक तरफ राम जन्मभूमि में रामलला का दर्शन कर धन्य होते हैं, तो दूसरी तरफ कुलदेवी बड़ी देवकाली के दरबार में हाजिरी लगाकर अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं.

