Business Desk – Share Market Crash : भारतीय शेयर बाजार में आज यानी 19 अगस्त 2026 को लगातार सातवें कारोबारी दिन बिकवाली का दबाव बना हुआ है। सेंसेक्स इंट्रा-डे में 411.55 अंक टूटकर 76,823.91 के स्तर तक आ गया, जबकि निफ्टी भी 127 अंक गिरकर 24,027.90 तक पहुंच गया। सुबह 11:44 बजे सेंसेक्स 348.59 अंक यानी 0.45% गिरकर 76,886.87 और निफ्टी 104.70 अंक यानी 0.43% की गिरावट के साथ 24,050.20 पर कारोबार कर रहा था।

बाजार में गिरावट की बड़ी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से होर्मुज को अमेरिकी नक्शे में अमेरिका का हिस्सा दिखाना, ईरान के साथ बढ़ता तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में लगातार चौथे दिन उछाल और एशियाई बाजारों में भारी बिकवाली है।

7 दिन से लगातार दबाव में निफ्टी

निफ्टी में लगातार सातवें कारोबारी दिन कमजोरी देखने को मिल रही है। 10 अगस्त 2026 को निफ्टी करीब फ्लैट रहकर 24,583.80 पर बंद हुआ था। इसके मुकाबले आज इंट्रा-डे के निचले स्तर 24,027.90 तक निफ्टी में 555.90 अंक की गिरावट आ चुकी है। वहीं सेंसेक्स भी लगातार दबाव में है। 13 अगस्त को 0.15% की बढ़त के साथ 78,079.96 पर बंद हुए सेंसेक्स से तुलना करें तो आज के इंट्रा-डे लो 76,823.91 तक यह चार कारोबारी दिनों में 1,256.05 अंक टूट चुका है।

ट्रंप के नक्शे से बढ़ी जियो-पॉलिटिकल टेंशन

भारतीय शेयर बाजार में आज की गिरावट की बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक नक्शा जारी कर होर्मुज को अमेरिका का हिस्सा बताया है। इसके बाद जियो-पॉलिटिकल टेंशन और बढ़ गई है। दूसरी ओर ईरान ने किसी भी बातचीत से इनकार किया है। ईरान के विदेश मंत्री अराघची का कहना है कि बातचीत होगी तो ईरान की शर्तों पर ही होगी। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने से निवेशकों में चिंता बढ़ी है और इसका असर शेयर बाजारों पर दिखाई दे रहा है।

कच्चा तेल चौथे दिन महंगा, ब्रेंट 92 डॉलर के करीब

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में लगातार चौथे दिन तेजी है। ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड करीब 92 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भारत जैसे बड़े ऑयल इंपोर्टर देश के लिए चिंता बढ़ाती है। इससे कंपनियों की लागत और देश के आयात बिल पर दबाव बढ़ सकता है। इसी वजह से क्रूड में तेजी का असर इक्विटी मार्केट के सेंटीमेंट पर भी दिखाई दे रहा है।

एशियाई बाजारों में भारी बिकवाली

भारतीय बाजार को एशियाई बाजारों से भी कमजोर संकेत मिले हैं। दक्षिण कोरिया का कोस्पी 5% से ज्यादा कमजोर है। जापान का निक्केई 225 करीब 3% नीचे है। चीन का शंघाई कंपोजिट 2% से ज्यादा कमजोर है, जबकि ताइवान वेटेड इंडेक्स में डेढ़ फीसदी से ज्यादा की गिरावट है। थाईलैंड के SET कंपोजिट में करीब आधे फीसदी और सिंगापुर के स्ट्रेट टाइम्स में आधे फीसदी से थोड़ी कम गिरावट है। हालांकि, हॉन्ग कॉन्ग के हैंग सेंग में मामूली बढ़त देखने को मिल रही है। एशियाई बाजारों में व्यापक बिकवाली ने घरेलू निवेशकों के सेंटीमेंट पर भी दबाव बढ़ाया है।

FMCG और प्राइवेट बैंकिंग शेयरों में ज्यादा दबाव

बाजार में किसी भी प्रमुख सेक्टर का निफ्टी इंडेक्स फिलहाल हरे निशान में नहीं है। हालांकि, कुछ सेक्टर्स में गिरावट ज्यादा है। FMCG कंपनियों और हैवीवेट प्राइवेट बैंकिंग शेयरों में बिकवाली का दबाव बना हुआ है। इन दोनों के निफ्टी इंडेक्स में करीब आधे फीसदी की गिरावट देखने को मिल रही है। इसके अलावा ब्रॉडर मार्केट में भी कमजोरी है। निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 दोनों में करीब आधे-आधे फीसदी की गिरावट है।

निवेशकों की नजर अब ग्लोबल संकेतों पर

भारतीय शेयर बाजार में लगातार सातवें दिन बिकवाली के बीच निवेशकों की नजर अब कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिका-ईरान तनाव और एशियाई बाजारों के प्रदर्शन पर बनी हुई है। अगर जियो-पॉलिटिकल तनाव और क्रूड की कीमतों में तेजी जारी रहती है, तो घरेलू बाजार के सेंटीमेंट पर भी इसका असर बना रह सकता है।