शशि थरूर ने अपने व्यक्तित्व अधिकारों (Personality Rights) की सुरक्षा को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है। उन्होंने अदालत में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया है कि उनके नाम, तस्वीर, आवाज और सार्वजनिक पहचान का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। थरूर ने अपनी याचिका में कई प्रतिवादियों के खिलाफ राहत मांगी है, जिनमें कुछ अज्ञात लोग भी शामिल हैं। कानूनी भाषा में ऐसे अज्ञात पक्षों को “जॉन डो डिफेंडेंट” कहा जाता है। मामले की सुनवाई जस्टिस मिनी पुष्करणा की अदालत में 8 मई को होने वाली है। याचिका में थरूर ने अपने व्यक्तित्व और पहचान के अनधिकृत उपयोग पर रोक लगाने की मांग की है।

शशि थरूर ने अपनी याचिका में अदालत से यह भी मांग की है कि उनके नाम और छवि का इस्तेमाल कर बनाए गए कथित डीपफेक और AI-मॉर्फ्ड कंटेंट को विभिन्न प्लेटफॉर्म से हटाया जाए। उनका आरोप है कि ऐसे कंटेंट से उनकी सार्वजनिक छवि और व्यक्तित्व अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। इस याचिका के साथ थरूर उन कई चर्चित हस्तियों की सूची में शामिल हो गए हैं, जिन्होंने हाल के वर्षों में अपने पर्सनैलिटी राइट्स और पब्लिसिटी राइट्स की सुरक्षा के लिए दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है। इनमें अभिनेता, क्रिकेटर और अन्य सार्वजनिक हस्तियां शामिल रही हैं, जिन्होंने अपनी तस्वीर, आवाज, नाम और डिजिटल पहचान के कथित दुरुपयोग को लेकर कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

इस मामले को लेकर कौन-कौन पहुंचा कोर्ट?

दिल्ली हाई कोर्ट हाल के वर्षों में कई चर्चित हस्तियों के पर्सनैलिटी राइट्स से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण आदेश दे चुका है। इससे पहले अनिल कपूर और अमिताभ बच्चन ने भी अपने नाम, आवाज, तस्वीर और सार्वजनिक पहचान के बिना अनुमति इस्तेमाल के खिलाफ अदालत का रुख किया था। इन मामलों में अदालत ने खासतौर पर विज्ञापन, मर्चेंडाइजिंग और AI-जनरेटेड कंटेंट में उनकी पहचान के कथित दुरुपयोग को लेकर रोक लगाने संबंधी आदेश दिए थे।

इसी क्रम में शिल्पा शेट्टी ने भी करीब दो महीने पहले अपने पर्सनैलिटी राइट्स की सुरक्षा और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उनकी पहचान के कथित गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए अदालत में अपील दायर की थी। इस मामले में अदालत ने उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए थे। शिल्पा शेट्टी की टीम की ओर से जारी आधिकारिक बयान में भी इस कानूनी कार्रवाई और अदालत के आदेश की पुष्टि की गई थी।

अपनी याचिका में शिल्पा शेट्टी ने क्या कहा था?

दिल्ली हाई कोर्ट ने शिल्पा शेट्टी के पर्सनैलिटी राइट्स मामले में स्पष्ट किया था कि किसी भी व्यक्ति, विशेषकर सार्वजनिक हस्ती, के नाम, फोटो, आवाज, समानता या व्यक्तित्व का बिना अनुमति व्यावसायिक या भ्रामक तरीके से इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। अदालत ने अपने आदेश में विभिन्न ऑनलाइन और डिजिटल प्लेटफॉर्म को निर्देश दिया था कि शिल्पा शेट्टी से जुड़े कथित रूप से अपमानजनक, भ्रामक और अधिकारों का उल्लंघन करने वाले कंटेंट को तत्काल हटाया जाए।

कोर्ट ने यह भी कहा था कि किसी पब्लिक फिगर की पहचान का उनकी सहमति के बिना कमर्शियल इस्तेमाल स्वीकार्य नहीं है। आदेश में अदालत ने यह टिप्पणी भी की थी कि इंटरनेट को डीपफेक और डिजिटल नकल का मंच नहीं बनने दिया जा सकता। इस फैसले के बाद यह स्पष्ट किया गया कि बिना अनुमति शिल्पा शेट्टी के नाम, आवाज, तस्वीर या डिजिटल पहचान का गलत इस्तेमाल कानूनी कार्रवाई के दायरे में आएगा।

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