कैथल की सिरायकी परिवार संस्था जरूरतमंदों, बुजुर्गों और असहाय लोगों के लिए निशुल्क भोजन और राशन वितरण का कार्य कर रही है। संस्था का उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक सहायता पहुंचाना है।
राकेश कथूरिया, कैथल। समाज में ऐसे कई जरूरतमंद लोग हैं जो आर्थिक तंगी या शारीरिक असमर्थता के कारण दो वक्त की रोटी के लिए भी संघर्ष करते हैं। ऐसे लोगों का सहारा बनने के लिए कैथल की ‘सिरायकी परिवार’ संस्था एक अनुकरणीय कार्य कर रही है। संस्था ने वर्षों पहले यह संकल्प लिया था कि शहर में कोई भी व्यक्ति भूखा न सोए। इसी उद्देश्य को पूरा करने के लिए संस्था निरंतर निःशुल्क रात्रि भोजन और राशन वितरण का कार्य कर रही है। आज के राशन किट वितरण कार्यक्रम में कई जरूरतमंद परिवारों को खाद्य सामग्री प्रदान की गई, ताकि उनके घरों का चूल्हा बिना किसी रुकावट के जलता रहे और उन्हें अपनी मूलभूत आवश्यकताओं के लिए परेशान न होना पड़े।
सिरायकी परिवार की निःशुल्क भोजन सेवा
संस्था के प्रधान महेश धमीजा ने बताया कि दिल्ली में चल रही सामाजिक सेवाओं से प्रेरित होकर उन्होंने कैथल में इस पुनीत कार्य की शुरुआत की थी। सिरायकी परिवार न केवल भोजन उपलब्ध कराता है, बल्कि अकेले रहने वाले बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगजनों की जरूरतों का भी ख्याल रखता है। संस्था के स्वयंसेवक समय-समय पर ऐसे लोगों के पास जाकर उनका हालचाल जानते हैं और उन्हें हर संभव मदद मुहैया कराते हैं। संस्था का स्पष्ट मानना है कि वास्तविक विकास तभी सार्थक है, जब समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक मदद पहुंचे। यदि संस्था को किसी जरूरतमंद की सूचना मिलती है, तो टीम तत्काल वहां पहुंचकर सहायता प्रदान करती है।
मानवता की सेवा में निरंतर तत्पर
भोजन और राशन के अलावा सिरायकी परिवार पर्यावरण संरक्षण और आपदा प्रबंधन जैसे सामाजिक सरोकारों में भी सक्रिय है। कोविड-19 महामारी के दौरान संस्था ने प्रशासन के साथ मिलकर जनसेवा के अद्भुत उदाहरण पेश किए थे। संस्था का मानना है कि सेवा का यह कार्य सामूहिक सहयोग के बिना संभव नहीं है। शहर के अनेक समाजसेवी और व्यापारी संस्था के इस अभियान को निरंतर बल दे रहे हैं। अंत में, सिरायकी परिवार ने सभी नागरिकों से अपील की है कि यदि उनके आसपास कोई भी जरूरतमंद व्यक्ति हो, तो उसकी सूचना तुरंत संस्था को दें। संस्था हर जरूरतमंद तक पहुंचने और उनके जीवन में खुशहाली लाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।

