ओटीटी प्लेटफॉर्म पर इन दिनों ऐसी वेब सीरीज को दर्शक सबसे ज्यादा पसंद कर रहे हैं, जिनकी कहानियां आम जिंदगी से जुड़ी होती हैं। ‘पंचायत’, ‘गुल्लक’ और ‘ग्राम चिकित्सालय’ जैसी सीरीज की सफलता के बाद अब प्राइम वीडियो पर रिलीज हुई ‘आदर्श बाल विद्यालय’ (Adarsh Baal Vidyalaya) भी दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। महज सात एपिसोड की यह सीरीज सरकारी स्कूलों की व्यवस्था, शिक्षा व्यवस्था की चुनौतियों और बच्चों की मासूम दुनिया को व्यंग्य और कॉमेडी के जरिए बेहद दिलचस्प अंदाज में पेश करती है।

सीरीज में के.के. मेनन, अर्चना पूरन सिंह, देवेन भोजानी, अभिमन्यु सिंह, नवीन कस्तूरिया और प्रसन्ना बिष्ट जैसे दमदार कलाकार अहम भूमिकाओं में नजर आते हैं। अगर आपको ऐसी कहानियां पसंद हैं, जो हंसाने के साथ सोचने पर भी मजबूर करें, तो ‘आदर्श बाल विद्यालय’ (Adarsh Baal Vidyalaya) आपकी वॉचलिस्ट में जरूर होनी चाहिए।

सरकारी स्कूल की सच्चाई को दिखाती है कहानी

सीरीज का निर्देशन हिमांग गौर ने किया है। कहानी दिल्ली के काल्पनिक इलाके टिंकी टोली के सरकारी स्कूल ‘आदर्श बाल विद्यालय’ (Adarsh Baal Vidyalaya) के इर्द-गिर्द घूमती है। यहां न तो बच्चों की पढ़ाई में खास दिलचस्पी है और न ही कई शिक्षक अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से निभाते दिखाई देते हैं। स्कूल की हालत इतनी खराब है कि क्लासरूम तक दूसरे कामों के लिए इस्तेमाल होते हैं, जबकि हेडमास्टर बच्चों के साथ क्रिकेट खेलते नजर आते हैं। कहानी में यह भी दिखाया गया है कि कई छात्र 10वीं बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन वे पांचवीं कक्षा के सामान्य सवालों का जवाब भी नहीं दे पाते। यह स्थिति सरकारी शिक्षा व्यवस्था की कई वास्तविक चुनौतियों की ओर इशारा करती है।

जब बदलने की ठानी स्कूल की तस्वीर

कहानी में नया मोड़ तब आता है, जब हेडमास्टर ज्ञानेश्वर त्रिपाठी को पता चलता है कि अगर उनका स्कूल 10वीं बोर्ड परीक्षा के परिणाम के आधार पर दिल्ली-एनसीआर के टॉप 10 सरकारी स्कूलों में जगह बना लेता है, तो उन्हें और उनकी पत्नी को कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में ट्रेनिंग का मौका मिलेगा।

इसके बाद वह स्कूल की व्यवस्था सुधारने, बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रेरित करने और शिक्षकों को जिम्मेदारी का एहसास दिलाने की कोशिश शुरू करते हैं। इस दौरान नए शिक्षक की एंट्री, छात्रों की शरारतें और शिक्षकों की उलझनें कहानी को मनोरंजक बनाती हैं। खासकर रिप्रोडक्शन चैप्टर पढ़ाने के दौरान शर्मा मैडम के झिझक वाले दृश्य दर्शकों को हंसाने के साथ शिक्षा व्यवस्था की वास्तविकता भी दिखाते हैं।

दमदार लेखन और शानदार अभिनय

‘आदर्श बाल विद्यालय’ (Adarsh Baal Vidyalaya) की सबसे बड़ी ताकत इसकी लेखनी है। सीरीज को बिस्वपति सरकार और समीर सक्सेना ने लिखा है। समीर सक्सेना इससे पहले ‘पंचायत’, ‘गुल्लक’, ‘कोटा फैक्ट्री’ और ‘मामला लीगल है’ जैसी चर्चित सीरीज से जुड़े रहे हैं। यही वजह है कि इस सीरीज में भी साधारण घटनाओं को बेहद प्रभावशाली और भावनात्मक अंदाज में पेश किया गया है।

अभिनय की बात करें तो के.के. मेनन सहित सभी कलाकार अपने-अपने किरदारों में पूरी तरह फिट नजर आते हैं। कॉमेडी और भावनात्मक दृश्यों के बीच उन्होंने बेहतरीन संतुलन बनाया है, जिससे कहानी और ज्यादा असरदार बन जाती है।

देखनी चाहिए या नहीं?

अगर आपको ऐसी वेब सीरीज पसंद हैं, जिनमें मनोरंजन के साथ सामाजिक संदेश भी हो, तो ‘आदर्श बाल विद्यालय’ (Adarsh Baal Vidyalaya) एक अच्छा विकल्प साबित हो सकती है। यह सिर्फ सरकारी स्कूलों की समस्याओं को नहीं दिखाती, बल्कि यह भी बताती है कि सही सोच, मेहनत और टीमवर्क से बदलाव की शुरुआत कैसे की जा सकती है। सात एपिसोड की यह सीरीज हल्के-फुल्के हास्य, मजबूत अभिनय और सार्थक कहानी के जरिए दर्शकों को शुरुआत से अंत तक बांधे रखती है। यही वजह है कि रिलीज के बाद से यह ओटीटी पर तेजी से लोकप्रिय हो रही है और दर्शकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया हासिल कर रही है।