प्रदीप मालवीय, उज्जैन। उज्जैन के प्राचीन श्री बड़ा गणेश मंदिर में इस बार भी रक्षाबंधन से पहले देश-विदेश से राखियां पहुंची हैं। भगवान गणेश को अपना भाई मानने वाली महिलाओं ने अमेरिका, जर्मनी, हॉन्गकॉन्ग, सिंगापुर और यूनाइटेड किंगडम सहित कई देशों से राखियां भेजी हैं । बड़ा गणेश मंदिर के पुजारी पंडित अक्षत व्यास ने बताया कि रक्षाबंधन की परंपरा वैदिक काल से चली आ रही है। पहले राजपुरोहित अपने यजमान या राजा को रक्षा सूत्र बांधकर राष्ट्र और धर्म की रक्षा का संकल्प दिलाते थे। बाद में भगवान श्रीकृष्ण और द्रौपदी से जुड़ी मान्यता के बाद भाई-बहन के बीच राखी बांधने की परंपरा आगे बढ़ी।
बड़ा गणेश मंदिर के पुजारी पंडित अक्षत व्यास के अनुसार, भगवान शिव और माता पार्वती को जगत के माता-पिता माना जाता है और उनके पुत्र भगवान गणेश को कई महिलाएं अपने भाई के रूप में मानती हैं। इसी भाव के साथ रक्षाबंधन पर उन्हें राखी बांधी जाती है। इस बार भारत के अलग-अलग राज्यों से भी राखियां पहुंची हैं। मुंबई, कोलकाता, दिल्ली और कर्नाटक समेत कई जगहों से भक्तों ने भगवान गणेश के लिए राखियां भेजी हैं।
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वहीं अमेरिका के न्यूयॉर्क और न्यू जर्सी, हॉन्गकॉन्ग, सिंगापुर, जर्मनी और यूनाइटेड किंगडम से भी राखियां आई हैं। कई महिलाएं ऐसी हैं जिनके भाई नहीं हैं। वे भगवान गणेश को ही अपना भाई मानकर राखी भेजती हैं। जब वे उज्जैन आती हैं तो बड़ा गणेश मंदिर पहुंचकर अपने भाई के दर्शन करना भी नहीं भूलतीं। रक्षाबंधन के अवसर पर भगवान गणेश को विशेष राखियां अर्पित की जाएंगी। इनमें चांदी की राखी, सोने की गिन्नी लगी राखी और बड़ी विशेष राखी शामिल है। अखंड भारत के संकल्प के साथ भगवान गणेश को यह राखी अर्पित की जाएगी।
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